पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने बड़ा आंकड़ा दिखाया है। कुल मतदाता संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ रह गई है। यानी 58 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। Election Commission of India का कहना है कि यह अंतिम सूची नहीं है। अभी दावे और आपत्तियों का दौर बाकी है। इसके बाद संशोधन संभव है। आयोग के मुताबिक मौत, स्थायी पलायन और दो जगह नाम होना प्रमुख कारण हैं। कई लोगों ने फॉर्म भी जमा नहीं किए। इसलिए यह आंकड़ा अस्थायी माना जा रहा है।
हिंदी भाषी इलाकों में कटौती ज्यादा क्यों?
ड्राफ्ट आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि हिंदी भाषी इलाकों में नाम कटने की दर ज्यादा रही। कोलकाता उत्तर और दक्षिण जैसे क्षेत्रों में 20 प्रतिशत से अधिक नाम हटे हैं। जोरासांको और चौरंगी में तो यह आंकड़ा 35 प्रतिशत के आसपास पहुंच गया। ये इलाके राजनीतिक रूप से अहम माने जाते हैं। यहां गैर-बंगाली आबादी ज्यादा रहती है। माना जा रहा है कि कई लोगों ने अपने गृह राज्य की वोटर लिस्ट चुनी। इसी वजह से बंगाल की सूची से नाम कटे।
मतुआ बहुल सीटों पर असर कितना पड़ा?
मतुआ समुदाय को भाजपा का अहम वोटबैंक माना जाता है। ड्राफ्ट लिस्ट में मतुआ बहुल इलाकों में भी बड़ी कटौती दिखी है। कसबा और सोनारपुर दक्षिण जैसे क्षेत्रों में 10 से 18 प्रतिशत तक नाम हटे। बनगांव उत्तर में भी हजारों वोटरों के नाम नहीं रहे। इससे चुनावी गणित बदल सकता है। राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ी है। खासकर भाजपा के लिए यह झटका माना जा रहा है।
मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में कटौती कम क्यों रही?
ड्राफ्ट आंकड़ों के अनुसार मुस्लिम बहुल इलाकों में नाम हटने की दर कम रही। मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे जिलों में कटौती 10 प्रतिशत से नीचे है। डोमकल, रेजिनगर और शमशेरगंज जैसी सीटों पर आंकड़ा 5 प्रतिशत के आसपास रहा। किसी भी मुस्लिम बहुल सीट पर 10 प्रतिशत से ज्यादा कटौती नहीं दिखी। यही अंतर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। विपक्ष इसे चयनात्मक प्रक्रिया बता रहा है।
टीएमसी ने आंकड़ों के सहारे क्या कहा?
टीएमसी महासचिव Abhishek Banerjee ने ड्राफ्ट लिस्ट के आंकड़ों का हवाला देकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि घुसपैठियों को लेकर भाजपा का दावा झूठा साबित हुआ है। आयोग के मुताबिक सिर्फ 1.83 लाख फर्जी वोटर मिले हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल को बदनाम करने के लिए भाजपा को माफी मांगनी चाहिए। टीएमसी प्रवक्ताओं ने भी कहा कि ड्राफ्ट लिस्ट प्रवासियों की मौजूदगी दिखाती है।
भाजपा ने प्रक्रिया पर क्या आरोप लगाए?
भाजपा नेताओं ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि राज्य प्रशासन ने निष्पक्षता नहीं बरती। नेता प्रतिपक्ष Shubhendu Adhikari ने कहा कि प्रशासन ने जानबूझकर सूची में हेरफेर की। भाजपा ने मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar को पत्र लिखकर शिकायत की है। पार्टी का कहना है कि बूथ स्तर पर दबाव डाला गया। यह मुद्दा चुनाव से पहले बड़ा विवाद बन गया है।
आगे की राजनीति किस ओर जाएगी?
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने बंगाल की राजनीति में नई रेखा खींच दी है। दावे और आपत्तियों के बाद आंकड़े बदल भी सकते हैं। लेकिन अभी यह बहस थमने वाली नहीं है। सभी दल अपनी रणनीति नए सिरे से बना रहे हैं। मतदाता सूची अब बड़ा चुनावी मुद्दा बन चुकी है। अंतिम सूची आने तक सियासी तनाव बना रहेगा। इसका असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है।























