लाइफ स्टाइल न्यूज. छठ पूजा एक प्राचीन हिंदू पर्व है जो मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश में धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व दिवाली के छह दिन बाद मनाया जाता है और नेपाल सहित विदेशों में बसे भारतीय भी इसे पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं। चार दिवसीय यह पर्व सूर्य देव और उनकी बहन छठी मैया को समर्पित होता है।
छठ पर्व के चार दिन
पहला दिन: नहाय खाय
छठ पूजा का पहला दिन ‘नहाय खाय’ कहलाता है। इस दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और घर की पूरी सफाई करती हैं। फिर देवताओं की पूजा के बाद सात्विक भोजन करती हैं। नहाय खाय के मुख्य व्यंजनों में चावल, चने की दाल, कद्दू की सब्जी और पापड़ शामिल होते हैं।
दूसरा दिन: खरना या लोहंडा
दूसरे दिन महिलाएं दिनभर उपवास रखती हैं। इस दिन को ‘खरना’ या ‘लोहंडा’ कहा जाता है। महिलाएं स्नान करने के बाद मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ की खीर और मीठी रोटी बनाती हैं और इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करती हैं।
तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य
तीसरे दिन को संध्या अर्घ्य के रूप में मनाया जाता है। शाम को व्रती महिलाएं पास के नदी या तालाब में जाकर सूर्यास्त के समय सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करती हैं। महिलाएं कमर तक पानी में खड़ी होकर बांस के बने सूप में पूजा सामग्री सजाकर सूर्य देव को अर्घ्य देती हैं। सूप में रखी सामग्री को बहुत ध्यानपूर्वक व्यवस्थित किया जाता है।
चौथा दिन: उषा अर्घ्य
छठ पूजा का चौथा और अंतिम दिन उषा अर्घ्य के लिए समर्पित होता है। व्रती महिलाएं सुबह-सवेरे फिर से नदी या तालाब पर जाकर उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करती हैं और इसके बाद अपने उपवास को तोड़ती हैं। इस विधि के पूरा होते ही छठ पर्व का समापन होता है।
छठ पूजा के सूप में मिलने वाली सामग्री
संध्या और उषा अर्घ्य के समय व्रती महिलाएं अपने परिवार और अन्य श्रद्धालुओं के साथ जलाशय पर जाती हैं। अर्घ्य अर्पित करने के लिए सूप का विशेष महत्व है, जिसमें पूजा के लिए जरूरी वस्तुएं सजाई जाती हैं।
छठ पूजा के सूप में विभिन्न सामग्रियां होती हैं,
- ठेकुआ (गेहूं का आटा, गुड़ और घी से बनी प्रसाद)
हल्दी और अदरक
फल (सेब, शरीफा, संतरा, सिंघाड़ा, केला)
साबुत नारियल
सुथनी (जमीन के नीचे उगने वाला फल)
करवा (टोंटी वाला बर्तन)
मूली और गाजर
गन्ना
जायफल
सतलू
गुलाबी या लाल अड़हुल के पत्ते
शकरकंद
बड़ा नींबू
सुपारी
सिंदूर
अगरबत्ती
पान के पत्ते
घी का दीया
फूल
दूध
लाल चावल
लाल या पीला कपड़ा (सूप को बांधने के लिए)
प्रत्येक सामग्री का खास प्रतीकात्मक महत्व होता है, जो परिवार की समृद्धि, सुख-समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक है। यह पर्व कार्तिक महीने में मनाया जाता है, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार अक्टूबर या नवंबर में आता है। इस वर्ष छठ पूजा 5 से 8 नवंबर तक मनाई जा रही है।

























