पिछले कुछ महीनों में वाराणसी में कोडीन-आधारित कफ सिरप की तस्करी का एक बड़ा गिरोह पकड़ा गया। पुलिस और दवा विभाग की जांच में सामने आया कि हजारों बोतलें अलग-अलग राज्यों और पड़ोसी देशों में भेजी जा रही थीं। जांच अधिकारियों ने पाया कि कई कंपनियां सिर्फ कागजों पर बनाई गई थीं और असल में उनका कोई कार्यालय, स्टाफ या उत्पादन गतिविधि नहीं थी। इन फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल सिर्फ अवैध सप्लाई के लिए हो रहा था। प्रशासन अब तक लाखों बोतलें जब्त कर चुका है और कई एफआईआर दर्ज हुई हैं। यह खुलासा दवा नियंत्रण व्यवस्था की कमजोरियों को भी उजागर करता है।
बिना लाइसेंस और झूठे दस्तावेज़ का इस्तेमाल
जांच में पाया गया कि तस्करों ने नकली कागजात के जरिए दवा उत्पादन और वितरण का लाइसेंस दिखाया। कई मेडिकल स्टोर बिना अनुमति ऐसी दवाएं बेच रहे थे। स्टॉक छिपाकर रखा जाता था ताकि निरीक्षण के दौरान पता न चले। अधिकारियों का कहना है कि यह काम काफी संगठित तरीके से किया गया और इसमें कुछ पेशेवरों की भी भूमिका हो सकती है। ऐसे मामलों ने यह चिंता बढ़ाई है कि अगर कफ सिरप जैसे साधारण दवा का भी दुरुपयोग हो सकता है तो बाकी नशीले पदार्थों का क्या स्तर होगा। मामला अभी जांच में है और कार्रवाई जारी है।
कोडीन क्यों मिलाया जाता है कफ सिरप में
कोडीन एक ओपिओइड दवा है जिसका इस्तेमाल डॉक्टर तेज और लगातार खांसी में करते हैं। यह मस्तिष्क के उस हिस्से पर असर करती है जो खांसी के संकेत भेजता है, जिससे तुरंत राहत मिलती है। चिकित्सकीय भाषा में इसे कफ सप्रेसेंट कहा जाता है। यह केवल उन्हीं मरीजों को थोड़ी अवधि के लिए दिया जाता है जिन्हें सामान्य दवा से आराम नहीं मिल रहा हो। इस दवा का उपयोग सीमित मात्रा में ही सुरक्षित माना जाता है। डॉक्टर बिना प्रिस्क्रिप्शन इसके सेवन से बचने की सलाह देते हैं।
कोडीन कैसे बनाता है आदत
कोडीन शरीर को ऐसा असर देता है जिससे व्यक्ति को हल्की नींद और आराम महसूस होता है। यही असर धीरे-धीरे मन को इसे बार-बार लेने के लिए प्रेरित करता है। लगातार इस्तेमाल से शरीर इसकी आदत बना लेता है और फिर कम मात्रा से फायदा नहीं होता। ऐसे में लोग खुराक बढ़ाने लगते हैं जो बेहद खतरनाक हो सकता है। इसी कारण इसे नशीले पदार्थों के अंतर्गत नियंत्रित किया जाता है। कई देशों में इसका इस्तेमाल बहुत सख्ती से नियंत्रित होता है। भारत में भी इसके लिए कड़े नियम हैं लेकिन उनका पालन हमेशा नहीं होता।
डॉक्टरों की चेतावनी और सावधानी
दिल्ली के आरएमएल अस्पताल के मेडिसिन विभाग के डॉक्टर सुभाष गिरि बताते हैं कि कोडीन तुरंत खांसी कम तो करता है लेकिन इसके नुकसान अधिक हैं। उनके अनुसार यह दवा केवल विशेष मरीजों को ही थोड़े समय के लिए दी जानी चाहिए। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों के लिए यह खतरनाक हो सकती है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि इसे केवल चिकित्सकीय देखरेख में ही लिया जाए। खुद से सेवन करना स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है।
ओवरडोज के गंभीर दुष्प्रभाव
अगर इसकी मात्रा बढ़ा दी जाए तो व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत, चक्कर, भ्रम, बेहोशी और कभी-कभी मौत तक हो सकती है। कुछ मामलों में निम्न रक्तचाप भी देखने को मिला है। शरीर इसके आदी होने पर धीरे-धीरे सामान्य जीवन प्रभावित होने लगता है। इसलिए बहुत से मामलों में नशे के आदी लोग इसे सामान्य सिरप की तरह इस्तेमाल करने लगते हैं जो बेहद हानिकारक होता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि कफ सिरप दवा है, नशा नहीं।
क्या अब सख्त कार्रवाई होगी?
इस मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन अब सिस्टम सुधार की दिशा में काम कर रहा है। फर्जी कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई और दवा बिक्री पर सख्त निगरानी की तैयारी है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में लगी हैं कि यह सप्लाई किन-किन जगहों तक पहुंची। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों को रोकने के लिए डॉक्टर से प्रिस्क्रिप्शन दिखाना जरूरी होना चाहिए। सरकार से उम्मीद है कि ऐसे मामलों में सख्त कानून बनाकर दुरुपयोग पर लगाम लगाई जाएगी। जनता को भी समझना चाहिए कि खांसी की दवा अगर गलत तरीके से ली जाए तो यह जहर बन सकती है।























