असली भूख धीरे-धीरे लगती है।साधारण खाना उसे शांत कर देता है।क्रेविंग अचानक होती है।अक्सर किसी खास चीज की चाह होती है।जैसे मीठा या तला हुआ।यह शरीर की जरूरत नहीं होती।यह आदत से जुड़ी होती है।इस फर्क को समझना जरूरी है।
गलत दिनचर्या कैसे भूख बढ़ाती है?
समय पर न खाना बड़ी वजह है।लंबे समय तक स्क्रीन देखना।तनाव में रहना आम हो गया है।नींद पूरी न होना भी कारण है।ये सब भूख के संकेत बिगाड़ देते हैं।ब्लड शुगर तेजी से बदलता है।इससे अचानक खाने की इच्छा होती है।
कमजोर नाश्ता क्यों बढ़ाता है क्रेविंग?
सुबह का नाश्ता सबसे जरूरी होता है।चाय-बिस्कुट सिर्फ आदत है।सफेद ब्रेड जल्दी भूख बढ़ाती है।ब्लड शुगर जल्दी गिरता है।थोड़ी देर में फिर भूख लगती है।प्रोटीन और फाइबर जरूरी हैं।अंडा, दाल चीला या ओट्स बेहतर हैं।
क्या पानी की कमी भी भूख बन जाती है?
कई बार शरीर प्यास को भूख समझ लेता है।सर्दियों में लोग कम पानी पीते हैं।शरीर को पानी चाहिए होता है।लेकिन दिमाग खाने का संकेत देता है।जब अचानक भूख लगे।एक गिलास पानी पिएं।दस मिनट में फर्क दिखेगा।
नींद पूरी न हो तो भूख क्यों बढ़ती है?
नींद की कमी से भूख बढ़ती है।भूख बढ़ाने वाला हार्मोन ज्यादा बनता है।पेट भरा होने का संकेत कम होता है।मीठा और जंक फूड खाने का मन करता है।चॉकलेट की चाह बढ़ती है।रोज सात से आठ घंटे सोना जरूरी है।इससे क्रेविंग कम होती है।
इमोशनल ईटिंग को कैसे रोकें?
कई लोग बोर होकर खाते हैं।कुछ तनाव में खाने लगते हैं।इसे इमोशनल ईटिंग कहते हैं।काम का दबाव मीठा मांगता है।खाली समय नमकीन की चाह जगाता है।खाने की जगह टहलें।गहरी सांस लें या म्यूजिक सुनें।
क्रेविंग कंट्रोल करने का सबसे आसान तरीका क्या है?
कड़े नियम बनाने की जरूरत नहीं।समय पर खाना शुरू करें।संतुलित नाश्ता करें।पर्याप्त पानी पिएं।नींद पूरी लें।तनाव से दूरी बनाएं।ये छोटे बदलाव काफी हैं।कुछ दिनों में असर दिखने लगेगा।

























