होली रंग और खुशी का त्योहार है। नई बहू के लिए यह पहला बड़ा त्योहार होता है। कई घरों में उसे ससुराल में नहीं रोका जाता। सम्मान से मायके भेजा जाता है। बुजुर्ग इसे पुरानी परंपरा बताते हैं। कहा जाता है इससे घर में शांति बनी रहती है। इसलिए आज भी कई परिवार इसे निभाते हैं।
क्या होलिका की कहानी से जुड़ा है?
पुरानी कथा के अनुसार होलिका आग में बैठी थी। उसने प्रह्लाद को जलाने की कोशिश की। लेकिन भक्ति से प्रह्लाद बच गया। होलिका आग में जल गई। कहा जाता है उसकी शादी अगले दिन होने वाली थी। लोगों ने इस कथा को परंपरा से जोड़ दिया। इसे अशुभ संकेत से भी जोड़ा जाता है।
क्या सास-बहू रिश्ते की सुरक्षा के लिए?
नया रिश्ता समय लेता है। शादी के बाद शुरुआती दिन संवेदनशील होते हैं। अगर त्योहार पर कोई बात बिगड़ जाए तो दूरी बढ़ सकती है। इसलिए बहू को मायके भेजा जाता है। दोनों घर आराम से त्योहार मनाते हैं। रिश्ता धीरे-धीरे मजबूत होता है। इसे समझदारी भरी सोच माना जाता है।
क्या सम्मान और मर्यादा की बात?
होली में रंग और मजाक होता है। नई बहू अभी घर के माहौल में ढल रही होती है। बुजुर्ग कई बार खुलापन पसंद नहीं करते। इसलिए पहली होली मायके मनाने की सलाह दी जाती है। इसे सम्मान से जोड़ा जाता है। दामाद को भी ससुराल बुलाया जाता है। इससे दोनों परिवारों में अपनापन बढ़ता है।
क्या भावनाएं भी वजह बनती हैं?
शादी के बाद लड़की नए घर आती है। पहला त्योहार आते ही उसे मायके की याद आती है। मायके में वह खुलकर खुशियां मना सकती है। माता-पिता भी चाहते हैं बेटी घर आए। इससे उसका मन हल्का होता है। यह परंपरा भावनाओं से भी जुड़ी है। कई जगह गर्भवती महिला भी पहली होली मायके मनाती है।
क्या आज भी यह परंपरा जीवित है?
आज कई परिवार इस रिवाज को नहीं मानते। नई पीढ़ी अपनी सुविधा से फैसला करती है। लेकिन कई घरों में यह परंपरा अब भी निभाई जाती है। लोग इसे संस्कृति का हिस्सा मानते हैं। इसे अंधविश्वास नहीं बल्कि परिवार जोड़ने का तरीका कहते हैं। समय बदलता है पर कहानियां बनी रहती हैं।
























