आज मोबाइल बिना जीवन अधूरा लगता है। सुबह उठते ही फोन हाथ में आ जाता है। टॉयलेट जाते समय भी लोग मोबाइल साथ ले जाते हैं। रील और वीडियो देखते हुए समय का अंदाजा नहीं रहता। कुछ मिनट आधे घंटे में बदल जाते हैं। यही आदत धीरे धीरे नुकसान करती है। लोग खुद को रोक नहीं पाते। डॉक्टर इसे खतरनाक मानते हैं। टॉयलेट सीट पर देर तक बैठने से पाचन बिगड़ता है। मोबाइल देखने से ध्यान शरीर से हट जाता है। पेट पूरी तरह साफ नहीं हो पाता। कब्ज की समस्या बढ़ जाती है। अंदर दबाव बनता है। पेट भारी रहने लगता है। रोज ऐसा होने पर बीमारी पक्की हो जाती है।
क्या पाइल्स का खतरा बढ़ जाता है?
लंबे समय तक टॉयलेट पर बैठने से रेक्टम पर दबाव पड़ता है। इससे नसें सूजने लगती हैं। यही पाइल्स की शुरुआत होती है। कई लोगों को खून आने की शिकायत होती है। मोबाइल के कारण समय का एहसास नहीं रहता। डॉक्टर तुरंत यह आदत छोड़ने की सलाह देते हैं। नहीं तो इलाज मुश्किल हो सकता है। टॉयलेट में मोबाइल देखने के लिए गर्दन झुकानी पड़ती है। यह शरीर की प्राकृतिक स्थिति नहीं है। गर्दन और कंधों पर दबाव पड़ता है। कुछ समय बाद जकड़न होती है। कमर दर्द भी शुरू हो सकता है। रीढ़ की हड्डी पर असर पड़ता है। युवाओं में भी यह समस्या दिख रही है।
क्या मोबाइल पर बैक्टीरिया चिपकते हैं?
टॉयलेट में बहुत सारे बैक्टीरिया होते हैं। मोबाइल स्क्रीन पर ये आसानी से चिपक जाते हैं। बाद में वही फोन चेहरे के पास जाता है। इससे इन्फेक्शन फैल सकता है। कई रिसर्च में यह बात सामने आई है। टॉयलेट वाला फोन सबसे ज्यादा गंदा माना गया है। साफ करने से भी पूरा खतरा नहीं जाता। टॉयलेट का समय शरीर के लिए आराम का समय होता है। मोबाइल देखने से दिमाग व्यस्त रहता है। शरीर को सही संकेत नहीं मिलते। प्राकृतिक प्रक्रिया अधूरी रहती है। मन भारी लगता है। धीरे धीरे तनाव बढ़ता है। स्वास्थ्य के लिए मोबाइल से दूरी जरूरी है।
डॉक्टर सलाह देते हैं कि टॉयलेट में मोबाइल न ले जाएं। सीमित समय में काम पूरा करें। शरीर के संकेतों को समझें। पानी और फाइबर का सेवन बढ़ाएं। सही बैठने की आदत डालें। छोटी सावधानी बड़ी बीमारी से बचा सकती है। यह आदत बदलना जरूरी है।

























