Sports News: दक्षिण अफ्रीका ने 27 साल के लंबे इंतजार के बाद आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025 जीत ली है। टीम ने लॉर्ड्स के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया को हराकर ऐतिहासिक जीत हासिल की। इस जीत के साथ ही कप्तान टेम्बा बावुमा ने अपनी कप्तानी का लोहा मनवा लिया। बावुमा ने बतौर कप्तान एक भी टेस्ट मैच नहीं हारा, फिर भी उन्हें वो सम्मान नहीं मिल रहा जो अक्सर विराट कोहली या रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ियों को मिलता है। सवाल उठता है: क्यों?
टेम्बा बावुमा की कप्तानी में ऐतिहासिक सफलता
टेम्बा बावुमा ने बतौर कप्तान 10 में से 9 टेस्ट जीते हैं और एक मैच ड्रॉ रहा। उनकी अगुआई में दक्षिण अफ्रीका ने आईसीसी ट्रॉफी जीतकर इतिहास रच दिया। ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम को हराना आसान नहीं था, लेकिन बावुमा की रणनीति और टीम का संतुलन जीत में निर्णायक साबित हुआ।
व्यक्तिगत प्रदर्शन पर सवाल
वैसे तो बावुमा की कप्तानी की तारीफ हो रही है, लेकिन उनकी बल्लेबाजी को लेकर आलोचना होती रही है। बावुमा का टेस्ट करियर औसत लगभग 38 रन प्रति पारी है, जो उन्हें विराट कोहली या रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ियों के स्तर से थोड़ा पीछे रखता है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बल्लेबाजी में उनके बल्लेबाजी के आंकड़े नहीं देखे जाते, तब तक उन्हें ‘दिग्गजों’ की सूची में शामिल करना मुश्किल होगा।
विराट और रोहित से तुलना
विराट कोहली और रोहित शर्मा ने न केवल कप्तानी में सफलता हासिल की है, बल्कि व्यक्तिगत प्रदर्शन का भी उच्च स्तर बनाए रखा है। कोहली का टेस्ट औसत 50 से ऊपर है, जबकि रोहित शर्मा ने टीम इंडिया को आईसीसी टूर्नामेंट भी जिताए हैं। दोनों खिलाड़ियों को अपनी कप्तानी के साथ-साथ बल्लेबाजी जारी रखने के कारण दिग्गज का दर्जा मिला।
मीडिया और प्रशंसकों की अनदेखी
बावुमा की उपलब्धियों के बावजूद उन्हें मीडिया और क्रिकेट प्रेमियों से वो पहचान नहीं मिल पा रही है जो आमतौर पर एक आईसीसी विजेता कप्तान को मिलती है। इसकी वजह उनका शांत स्वभाव, सीमित ब्रांड वैल्यू और क्रिकेट की मुख्यधारा में दक्षिण अफ्रीका में कम लोकप्रियता भी हो सकती है। साथ ही पिछले दिनों आईसीसी टूर्नामेंटों में टीम की नाकामी के कारण लोगों की उम्मीदें भी कम हो गई थीं। टेम्बा बावुमा ने कप्तान के तौर पर दक्षिण अफ्रीका को गौरवान्वित किया है।
वह रणनीतिक रूप से मजबूत, शांत और धैर्यवान कप्तान हैं। हालांकि, निजी प्रदर्शन और ब्रांड वैल्यू की कमी के कारण उन्हें वो सम्मान नहीं मिल पा रहा है जो दूसरे देशों के कप्तानों को मिलता है। अगर भविष्य में भी वह इसी तरह की निरंतरता बनाए रखते हैं तो क्रिकेट जगत उन्हें भी कोहली, स्मिथ या रोहित की ही श्रेणी में रखेगा।























