लखनऊ और कोलकाता के बीच मुकाबला शुरू से ही कांटे का था। दोनों टीमों ने एक-दूसरे पर लगातार दबाव बनाया। मैच जैसे-जैसे आगे बढ़ा, रोमांच भी बढ़ता गया। हर ओवर के साथ मुकाबला और कड़ा होता गया। आखिरी ओवर तक स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई। हर गेंद पर नतीजा बदलता दिख रहा था। दर्शक अपनी सीट से हिलने को तैयार नहीं थे।
क्या मुकुल ने अकेले मैच पलटा?
मुकुल चौधरी की शुरुआत धीमी रही। उन्होंने पहली आठ गेंदों पर सिर्फ दो रन बनाए। इसके बाद उन्होंने अचानक खेल बदल दिया। एक के बाद एक बड़े शॉट लगाए। कुल सात छक्के जड़ दिए। उनकी नाबाद 54 रन की पारी ने मैच का रुख बदल दिया। हर शॉट के साथ उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया। केकेआर के गेंदबाज दबाव में आ गए।
क्या आखिरी ओवर में हुआ चमत्कार?
लखनऊ को आखिरी ओवर में 14 रन चाहिए थे। यह लक्ष्य आसान नहीं था। मुकुल ने दबाव को खुद पर हावी नहीं होने दिया। पांचवीं गेंद पर उन्होंने जोरदार छक्का लगाया। स्कोर बराबर हो गया। आखिरी गेंद पर एक रन चाहिए था। मुकुल ने बिना घबराए रन पूरा किया। टीम को यादगार जीत मिल गई।
क्या गोयनका खुद को रोक नहीं पाए?
जैसे ही लखनऊ ने जीत दर्ज की, मैदान का माहौल बदल गया। टीम के मालिक संजीव गोयनका खुद को रोक नहीं पाए। वह मैदान की ओर दौड़ पड़े। उन्होंने मुकुल चौधरी को गले लगा लिया। यह दृश्य कैमरे में कैद हो गया। इससे जीत की अहमियत साफ दिखी। ड्रेसिंग रूम में जश्न का माहौल बन गया।
क्या बडोनी ने भी निभाया अहम रोल?
इस मैच में आयुष बडोनी ने भी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने 54 रन की शानदार पारी खेली। उनकी बल्लेबाजी ने टीम को संभाला। पारी में सात चौके और दो छक्के शामिल थे। उन्होंने मिडिल ओवर्स में रन गति बनाए रखी। उनकी वजह से टीम मुकाबले में बनी रही। बाद में मुकुल ने मैच खत्म किया।
क्या केकेआर की बल्लेबाजी मजबूत थी?
कोलकाता नाइट राइडर्स ने पहले बल्लेबाजी की। टीम ने 181 रन बनाए। कप्तान अजिंक्य रहाणे ने 41 रन जोड़े। अंगकृष रघुवंशी ने 45 रन बनाए। अन्य बल्लेबाजों ने भी योगदान दिया। एक समय यह स्कोर मजबूत लग रहा था। लेकिन अंत में यह बच नहीं पाया।
क्या गेंदबाजी में एलएसजी ने दिखाया दम?
लखनऊ के गेंदबाजों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। मोहम्मद शमी ने कसी हुई गेंदबाजी की। चार ओवर में सिर्फ 27 रन दिए। उन्होंने नौ डॉट गेंदें फेंकी। अन्य गेंदबाजों ने भी अच्छा साथ दिया। मिडिल ओवर्स में रन रोककर दबाव बनाया। यही दबाव अंत में काम आया।

























