पंजाब में नशों के खिलाफ अभियान को एक साल पूरा हो गया है।सरकार कहती है अब लड़ाई सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं है।हर जिले में पुलिस ने लगातार कार्रवाई की है।नशा बेचने वालों पर ताबड़तोड़ छापे पड़े हैं।कई बड़े नाम भी कानून के घेरे में आए हैं।दावा है कि सप्लाई चेन कमजोर पड़ी है।अब सवाल है कि असर जमीन पर कितना दिख रहा है?
क्या आंकड़े पूरी कहानी बताते हैं?
एक साल में 36 हजार से ज्यादा एफआईआर दर्ज हुईं।51 हजार से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हुई।16 करोड़ 70 लाख रुपये की नशे की रकम जब्त की गई।2 हजार 276 किलो हेरोइन बरामद हुई।29 हजार किलो से ज्यादा भुक्की पकड़ी गई।686 किलो अफीम भी कब्जे में ली गई।सरकार का कहना है देश में सबसे बड़ी रिकवरी पंजाब ने की है।
क्या जनता ने भी साथ दिया?
इस बार मुहिम सिर्फ पुलिस तक सीमित नहीं रही।गांव स्तर पर रक्षा समितियां बनाई गईं।लोगों को एक सुरक्षित ऐप दी गई।वे सीधे पुलिस मुख्यालय को शिकायत भेज सकते हैं।48 घंटे में कार्रवाई जरूरी की गई।2 हजार से ज्यादा शिकायतों पर केस दर्ज हुए।इससे लोगों में भरोसा बढ़ा है।
पांच जोन की योजना कैसे चली?
पूरे राज्य को पांच जोन में बांटा गया।हर जोन में अलग अधिकारी तैनात किए गए।जिला और हल्का स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई।रोजाना रिपोर्ट ली जा रही है।छोटे स्तर के तस्करों तक भी पहुंच बनाई गई।सरकार कहती है अब कोई इलाका अनदेखा नहीं।इसे योजनाबद्ध मॉडल बताया जा रहा है।
क्या नशा मुक्ति केंद्र बदले?
पहले कई केंद्रों की हालत खराब थी।अब उन्हें साफ और बेहतर बनाया गया है।इलाज के साथ हुनर सिखाया जा रहा है।प्लंबिंग और इलेक्ट्रिक काम की ट्रेनिंग दी जा रही है।कुछ जगह फास्ट फूड की ट्रेनिंग भी शुरू हुई है।निजी कंपनियां रोजगार में मदद कर रही हैं।मकसद है व्यक्ति इज्जत के साथ समाज में लौटे।
पिछली सरकारों पर क्यों निशाना?
मौजूदा सरकार पुरानी सरकारों पर सवाल उठाती है।कहा जाता है राजनीतिक सरपरस्ती से माफिया मजबूत हुआ।2007 से 2022 तक बड़े वादे हुए पर असर कम दिखा।अब दावा है कि नीयत साफ है।कई बड़े घरों पर भी कार्रवाई हुई है।कुछ संपत्तियां सील की गईं।सियासी माहौल भी गरम है।
क्या उड़ता से रंगला बनेगा?
कभी पंजाब को उड़ता कहा गया था।अब नारा है रंगला पंजाब।सरकार कहती है तस्कर राज्य छोड़ रहे हैं।लेकिन असली परीक्षा समय करेगा।अगर सप्लाई सच में टूटी तो असर दिखेगा।युवाओं को रोजगार देना भी जरूरी है।जनभागीदारी बनी रही तो तस्वीर बदल सकती है।पंजाब की पहचान फिर मजबूत हो सकती है।
























