आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कहा गया है कि भारत में इंटरनेट तक पहुंच अब बड़ी समस्या नहीं रही।लेकिन इसके साथ नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।खासकर 15 से 29 वर्ष के युवाओं में इंटरनेट और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग चिंता का विषय बन गया है।रिपोर्ट में डिजिटल लत को गंभीर खतरा बताया गया है।सरकार ने माना है कि इसका असर पढ़ाई काम और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
डिजिटल लत से युवाओं पर क्या असर पड़ रहा है?
सर्वेक्षण के अनुसार इंटरनेट की ज्यादा आदत से युवाओं में पढ़ाई के घंटे कम हो रहे हैं।कामकाज की उत्पादकता पर भी असर पड़ रहा है।मानसिक तनाव बढ़ रहा है।चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।आत्मसम्मान में कमी भी देखी जा रही है।सरकार ने इसे सामाजिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से खतरनाक बताया है।
गेमिंग की लत क्यों बन रही है बड़ी समस्या?
रिपोर्ट में गेमिंग डिसऑर्डर पर भी खास ध्यान दिया गया है।कहा गया है कि जरूरत से ज्यादा गेम खेलने से नींद प्रभावित होती है।आक्रामक व्यवहार बढ़ सकता है।सामाजिक अलगाव की स्थिति बनती है।डिप्रेशन का खतरा भी रहता है।कई मामलों में ऑनलाइन जुए जैसी आदतें भी विकसित हो जाती हैं।यह युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर संकेत है।
साइबरबुलिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी का खतरा कितना बड़ा?
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि डिजिटल लत के कारण साइबरबुलिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी बढ़ रहे हैं।युवा जोखिम भरे ऑनलाइन व्यवहार में फंस सकते हैं।इससे वित्तीय नुकसान की आशंका रहती है।सरकार ने माना है कि इन खतरों का सही आकलन करने के लिए ठोस संकेतकों की जरूरत है।बिना आंकड़ों के सही नीति बनाना मुश्किल हो जाता है।
दुनिया के अन्य देश कैसे निपट रहे हैं इस समस्या से?
डिजिटल लत से निपटना अब वैश्विक चुनौती बन चुका है।ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाई है।चीन और दक्षिण कोरिया में भी सख्त नियम हैं।ब्राजील फ्रांस स्पेन फिनलैंड जापान और अमेरिका के कुछ राज्यों ने भी ऐसे कदम उठाए हैं।इन देशों का लक्ष्य बच्चों और युवाओं को ऑनलाइन खतरों से बचाना है।
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत में सबसे बड़ी समस्या राष्ट्रीय स्तर के ठोस आंकड़ों की कमी है।डिजिटल लत को लेकर पर्याप्त डेटा उपलब्ध नहीं है।इस वजह से लक्षित हस्तक्षेप मुश्किल हो जाता है।संसाधनों का सही उपयोग भी प्रभावित होता है।मानसिक स्वास्थ्य नीतियों में डिजिटल कल्याण को जोड़ने में भी बाधा आती है।
डिजिटल कल्याण के लिए सरकार ने क्या सुझाव दिए?
आर्थिक सर्वेक्षण ने डिजिटल स्वच्छता पर जोर दिया है।युवाओं को ऑनलाइन कंटेंट चुनने की समझ देने की बात कही गई है।शिक्षा रोजगार और नागरिक भागीदारी के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का सही उपयोग जरूरी बताया गया है।साथ ही डिजिटल लत से बचाने के लिए नियम और मार्गदर्शन की सिफारिश की गई है।सरकार को उम्मीद है कि आने वाला राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण ठोस आंकड़े देगा।यह नीति निर्माण में मददगार साबित होगा।

























