अब लॉग इन करने का तरीका बदल सकता है। बार-बार पासवर्ड डालने की जरूरत नहीं होगी। फिंगरप्रिंट और फेस आईडी भी पीछे रह सकते हैं। नई तकनीक खुद आपकी पहचान करेगी। आपको कुछ करने की जरूरत नहीं होगी। सिस्टम खुद आपको पहचान लेगा। यह तकनीक तेजी से चर्चा में है।
क्या है VitalID तकनीक?
VitalID एक नई पहचान प्रणाली है। यह शरीर की हलचल से काम करती है। दिल की धड़कन और सांस को पहचानती है। इन्हीं संकेतों से यूजर की पहचान होती है। यह पूरी तरह ऑटोमैटिक सिस्टम है। किसी इनपुट की जरूरत नहीं होती। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है।
क्या हेडसेट से होगा लॉग इन?
यह तकनीक खास XR हेडसेट के लिए बनाई गई है। यानी वर्चुअल और ऑगमेंटेड रियलिटी डिवाइस। जैसे ही आप हेडसेट पहनेंगे। सिस्टम खुद एक्टिव हो जाएगा। आपको अलग से कुछ करने की जरूरत नहीं। यह अनुभव को आसान बनाता है। भविष्य के डिवाइस में यह आम हो सकता है।
कैसे पहचानती है शरीर की हलचल?
जब हम सांस लेते हैं, तो शरीर में कंपन होती है। दिल धड़कने पर भी हलचल बनती है। यह कंपन गर्दन और सिर तक जाती है। हर व्यक्ति में यह पैटर्न अलग होता है। हेडसेट के सेंसर इसे पकड़ लेते हैं। फिर सिस्टम यूजर की पहचान कर लेता है।
क्या नया हार्डवेयर लगेगा?
इस तकनीक के लिए अलग डिवाइस की जरूरत नहीं है। मौजूदा हेडसेट में ही यह काम कर सकता है। सिर्फ सॉफ्टवेयर अपडेट काफी होगा। यानी यूजर को कुछ नया खरीदने की जरूरत नहीं। इससे तकनीक अपनाना आसान हो जाता है। कंपनियां इसे तेजी से लागू कर सकती हैं।
क्या टेस्टिंग में सफल रही तकनीक?
इस सिस्टम को कई लोगों पर टेस्ट किया गया। लंबे समय तक इसका परीक्षण हुआ। सही यूजर को ज्यादातर बार पहचान लिया गया। सफलता दर 95 प्रतिशत से ज्यादा रही। गलत व्यक्ति को भी लगभग हर बार रोका गया। इससे इसकी विश्वसनीयता साबित होती है।
क्या है इसमें सुरक्षा का स्तर?
इस तकनीक को धोखा देना आसान नहीं है। सांस की नकल की जा सकती है। लेकिन अंदर की कंपन की नहीं। सिस्टम बड़ी हलचल को अलग कर देता है। सिर्फ असली संकेतों को पकड़ता है। इससे सुरक्षा मजबूत होती है। भविष्य में यह बड़ा बदलाव ला सकता है।
























