कनाडा अपने नागरिकता कानून में संशोधन करने जा रहा है। बिल सी-3 को अब शाही मंज़ूरी मिल गई है। इसका मतलब है कि नया कानून जल्द ही लागू हो जाएगा। इस बदलाव से हज़ारों भारतीय मूल के परिवारों को सीधा फ़ायदा होगा, क्योंकि पहले कई बच्चे नागरिकता पाने से वंचित रह जाते थे। यह फ़ैसला ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय बैठक की।
2009 में, कनाडा ने अपने नागरिकता नियमों पर एक प्रतिबंध लगाया, जिसे पहली पीढ़ी की सीमा कहा जाता है। यह नियम कनाडा के बाहर जन्मे या गोद लिए गए बच्चों को कनाडा की नागरिकता देने से रोकता है। इसके परिणामस्वरूप, काम या शिक्षा के लिए विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के माता-पिता के कई बच्चों को नागरिकता से वंचित कर दिया गया, जिससे हज़ारों परिवारों को कठिनाई का सामना करना पड़ा।
नये कानून में क्या बदलाव होगा?
बिल सी-3 के लागू होने के बाद, जो लोग प्राकृतिक नागरिक नहीं थे, वे भी नागरिक बन सकते हैं, बशर्ते उनका जन्म कानून के लागू होने से पहले हुआ हो। विदेश में जन्मा या विदेश में गोद लिया गया कोई भी कनाडाई नागरिक अपने बच्चे को नागरिकता दे सकता है, बशर्ते उसके माता-पिता का कनाडा से गहरा संबंध हो। यह नया नियम आधुनिक परिवारों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, क्योंकि आजकल लोग काम या अध्ययन के लिए दुनिया भर में रहते हैं।
अदालत का फैसला भी महत्वपूर्ण है
19 दिसंबर, 2023 को, ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट ने पहली पीढ़ी की यह सीमा असंवैधानिक घोषित की। अदालत का मानना था कि यह नियम कई बच्चों के साथ अन्यायपूर्ण था। कनाडा सरकार ने इस फैसले के खिलाफ अपील नहीं की, क्योंकि उसका मानना था कि पुराना कानून कई परिवारों को नुकसान पहुँचा रहा था।
यह कानून कब लागू होगा?
कनाडा की आव्रजन मंत्री लीना मेटलेज-डियाब ने कहा कि नया कानून अतीत में हुए अन्याय को दूर करेगा, पहले बाहर रखे गए लोगों को नागरिकता प्रदान करेगा तथा भविष्य के लिए स्पष्ट और सरल नियम स्थापित करेगा। कानून के लागू होने की तारीख जल्द ही घोषित की जाएगी। तब तक, पुरानी सीमाओं के कारण नागरिकता से वंचित लोगों के लिए एक अंतरिम व्यवस्था जारी रहेगी।

























