अफगानिस्तान के उप प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने पाकिस्तान पर सीधा आरोप लगाया कि वह बार-बार व्यापारिक रास्ते बंद कर देता है जिससे व्यापारियों को बड़ा नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि अब अफगानिस्तान किसी भी कीमत पर ऐसे देश पर निर्भर नहीं रह सकता जो हर कुछ महीने बाद रास्ते रोक देता है और लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी कर देता है। बरादर ने साफ कहा कि अब व्यापारियों को खुद भी यह समझना होगा कि पाकिस्तान पर भरोसा करने का दौर खत्म हो चुका है और गलती दोहराने की गुंजाइश नहीं बची है। उन्होंने कहा कि देश की साख को बचाने के लिए यह कदम जरूरी था और अब नए रास्ते ही आगे का भविष्य तय करेंगे।
क्या व्यापारियों पर नई सख्ती बढ़ी?
बरादर ने सभी व्यापारियों को चेतावनी दी कि वे अपनी आयात-निर्यात गतिविधियां अब दूसरे देशों की ओर मोड़ें और समय पर यह बदलाव पूरा करें। उन्होंने कहा कि अफगान सरकार उन व्यापारियों की मदद नहीं करेगी जो अब भी पाकिस्तान के साथ कारोबार करना जारी रखेंगे। उन्होंने साफ कहा कि इस बार सरकार सख़्त रुख पर है और जो आदेश नहीं मानेंगे, वे खुद अपनी जिम्मेदारी पर होंगे। बरादर ने व्यापारियों को भरोसा दिया कि अफगानिस्तान के पास अब ऐसे कई रास्ते मौजूद हैं जो पाकिस्तान से सुरक्षित और बेहतर हैं।
क्या दवाइयों पर सबसे बड़ा खतरा?
अफगान उप प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान से आने वाली दवाइयों की गुणवत्ता को लेकर भी बड़ी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के अस्पतालों में जो सबसे बड़ी दिक्कत है, वह यही है कि पाकिस्तान से मिलने वाली दवाइयां बेहद खराब गुणवत्ता की हैं और लोगों की सेहत पर असर डालती हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के मामले में किसी तरह का जोखिम नहीं लिया जा सकता इसलिए दवा आयातकों को तुरंत अपने सप्लायर बदलने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह आदेश बहुत गंभीर है और लापरवाही बरदाश्त नहीं होगी।
क्या तीन महीनों में सब बदल जाएगा?
सरकार ने दवा आयातकों को विशेष रूप से कहा कि वे पाकिस्तान में अपने सारे खातों को बंद करें और तीन महीनों के अंदर वहां से व्यापार पूरी तरह खत्म करें। बरादर ने यह भी बताया कि दवा व्यापार से जुड़ी कई कंपनियां पहले ही नए देशों से सप्लाई लेने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर अफगानिस्तान अपनी सेहत सेवाओं को मजबूत बनाना चाहता है, तो यह कदम देर से नहीं बल्कि सही समय पर लिया गया है।
क्या पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति?
बरादर ने यह भी कहा कि पाकिस्तान हर बार राजनीतिक दबाव बनाकर व्यापार रोकता है और इसका असर अफगान कारोबारियों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि अब अफगानिस्तान किसी भी तरह की राजनीतिक चाल में नहीं फंसना चाहता और अपने फैसले खुद करना चाहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान शरणार्थियों और व्यापार दोनों को अपने हितों के लिए इस्तेमाल करता है जो अफगानिस्तान के लिए सही नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि अब इस तरह की राजनीति अफगानिस्तान स्वीकार नहीं करेगा।
क्या नए व्यापारिक रास्ते तैयार हो गए?
बरादर ने दावा किया कि अब अफगानिस्तान के पास कई नए व्यापारिक कॉरिडोर तैयार हो चुके हैं जिनके जरिए आसानी से आयात-निर्यात किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के कई देशों के साथ संबंध पहले से बेहतर हुए हैं और ये नए रास्ते अफगानिस्तान के व्यापार को ज्यादा मजबूत बनाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि व्यापारियों को इससे बड़ा फायदा मिलेगा क्योंकि ये रास्ते ज्यादा स्थिर और भरोसेमंद होंगे। बरादर ने कहा कि बदले हालात में अफगानिस्तान को खुद पर भरोसा करना ही होगा।
क्या पाकिस्तान को अब गारंटी देनी होगी?
बरादर ने आखिरी में कहा कि अगर पाकिस्तान भविष्य में व्यापारिक रास्ते खोलना चाहता है, तो उसे पहले मजबूत गारंटी देनी होगी कि वह अब कभी रास्ते बंद नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान बिना ऐसी गारंटी के कोई बातचीत नहीं करेगा। पाकिस्तान इस समय अफगानिस्तान को सीमेंट, दवाइयां, आटा, स्टील और कपड़ा भेजता है, जबकि अफगानिस्तान पाकिस्तान को कोयला, ताजे फल और अन्य सामान भेजता है। लेकिन अब यह व्यापार कितने दिन चलेगा, यह पाकिस्तान के रवैये पर ही निर्भर करेगा। बरादर ने कहा कि अफगानिस्तान अब अपनी शर्तों पर काम करेगा और किसी दबाव में नहीं आएगा।

























