स्विट्जरलैंड के दावोस में WEF के दौरान एक तस्वीर सामने आई। इसमें असीम मुनीर सूट में नजर आए। लेकिन सूट के नीचे बुलेटप्रूफ जैकेट साफ दिख रही थी। तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से फैली। लोगों ने सवाल पूछने शुरू किए। दावोस जैसे सुरक्षित मंच पर यह दृश्य चर्चा बन गया। कई लोगों ने इसे डर से जोड़ा। तस्वीर में असीम मुनीर के साथ अन्य पाक अधिकारी भी थे। विदेश मंत्री इशाक डार भी नजर आए। सभी औपचारिक पोशाक में थे। लेकिन नजर सिर्फ जैकेट पर गई। लोगों ने फोटो को ज़ूम करके देखा। जैकेट साफ दिखाई दी। इससे चर्चा और तेज हो गई।
तस्वीर वायरल होते ही मीम्स बनने लगे। ट्विटर और फेसबुक पर तीखी टिप्पणियां आईं। कुछ लोगों ने कहा यह सुरक्षा नहीं डर है। कुछ ने आंतरिक खतरे की बात की। पाक सेना की छवि पर सवाल उठे। ट्रोलिंग तेज हो गई। मामला अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक पहुंच गया।
क्या पहले भी ऐसा देखा गया है?
यह पहली बार नहीं है। दिसंबर 2025 में भी एक वीडियो वायरल हुआ था। उस वीडियो में मुनीर बुलेटप्रूफ कांच के पीछे दिखे थे। वे अपने अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। तब भी आलोचना हुई थी। लोग डर की बात कर रहे थे। मौजूदा तस्वीर उसी कड़ी से जुड़ी मानी जा रही है। कुछ रिपोर्ट के मुताबिक भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद सुरक्षा बढ़ाई गई। माना जा रहा है कि उसके बाद मुनीर ज्यादा सतर्क हैं। विश्लेषक इसे मानसिक दबाव मानते हैं। आंतरिक असंतोष की चर्चा भी होती रही है। पाक सेना के भीतर हलचल की बातें सामने आती हैं। तस्वीर इसी संदर्भ में देखी जा रही है।
WEF में पाकिस्तान का असली उद्देश्य क्या था?
पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल खास एजेंडे के साथ दावोस गया था। असीम मुनीर की मौजूदगी अहम मानी गई। पाकिस्तान ने ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस का न्योता स्वीकार किया। यह बोर्ड गाजा स्थिति पर नजर रखेगा। इसे कूटनीतिक मौका माना गया। लेकिन तस्वीर ने सारा ध्यान भटका दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि तस्वीर से नकारात्मक संदेश गया है। दावोस जैसे मंच पर डर का संकेत ठीक नहीं माना जाता। सवाल उठते हैं कि सेना प्रमुख खुद को असुरक्षित क्यों महसूस कर रहे हैं। यह तस्वीर लंबे समय तक चर्चा में रहेगी। पाकिस्तान के लिए यह कूटनीतिक झटका बन सकती है। छवि पर असर पड़ना तय है।

























