12 फरवरी 2026 को हुए चुनाव ने राजनीतिक तस्वीर बदल दी। लंबे समय की अस्थिरता के बाद जनता ने फैसला सुनाया। बीएनपी ने 299 में से 209 सीटें जीतीं। गठबंधन को कुल 212 सीटें मिलीं। यह साफ बहुमत है। तारिक रहमान ने दो सीटों से जीत दर्ज की। 17 साल बाद वापसी करने वाले तारिक के लिए यह बड़ी जीत मानी जा रही है। सहयोगी दलों को भी सीमित सफलता मिली।
क्या आवामी लीग चुनाव से बाहर रही?
शेख हसीना की आवामी लीग पर प्रतिबंध था। इसलिए वह चुनाव मैदान में नहीं उतर सकी। यह चुनाव ऐतिहासिक माना जा रहा है। जनता ने नया विकल्प चुना। विपक्ष की मजबूत वापसी हुई। कई छोटे दल पूरी तरह हार गए। राजनीतिक संतुलन बदल गया है।
क्या जमात गठबंधन ने भी प्रभाव दिखाया?
जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटें जीतीं। गठबंधन को कुल 77 सीटें मिलीं। यह दूसरा सबसे बड़ा समूह बनकर उभरा। नेशनल सिटिजन पार्टी को 6 सीटें मिलीं। कुछ सीटों पर स्वतंत्र उम्मीदवार भी जीते। कई पुराने दल अपना खाता नहीं खोल सके। यह परिणाम बड़े बदलाव का संकेत देता है।
क्या भारतीय प्रतीकों वाली पार्टियां भी हारीं?
कुछ पार्टियों के नाम और प्रतीक भारत जैसे थे। बैलगाड़ी प्रतीक वाली पार्टी को एक सीट मिली। हाथी और साइकिल चिन्ह वाली पार्टियां पूरी तरह हार गईं। हाथ और लालटेन वाले दल भी सफल नहीं हुए। जनता ने इन दलों को स्पष्ट रूप से नकार दिया। यह चर्चा का विषय बना रहा। इस बार मतदाताओं ने दो वोट डाले। एक सरकार चुनने के लिए। दूसरा संविधान संशोधन पर। भारी बहुमत से ‘हां’ में मतदान हुआ। मतदान प्रतिशत 59.44 रहा। इसे महत्वपूर्ण जनादेश माना जा रहा है।
क्या युवाओं की भूमिका अहम रही?
करीब 12.7 करोड़ मतदाताओं ने मतदान किया। बड़ी संख्या में युवा और पहली बार वोट देने वाले शामिल थे। सुरक्षा के लिए दस लाख कर्मी तैनात किए गए। चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। बीएनपी की वापसी ने नई राजनीतिक दिशा तय कर दी है। आवामी लीग की अनुपस्थिति ने समीकरण बदले। छोटे दलों का सफाया हुआ। नई सरकार के सामने कई चुनौतियां होंगी। जनता स्थिरता और विकास की उम्मीद कर रही है। आने वाले समय में इसका असर साफ दिखेगा। यह चुनाव ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है।
























