बांग्लादेश की राजनीति में नया विवाद सामने आया है।राष्ट्रपति शाहाबुद्दीन ने यूनुस सरकार पर सवाल उठाए हैं।उन्होंने कहा कि अंतरिम शासन के दौरान संविधान का उल्लंघन हुआ।राष्ट्रपति ने अपने अधिकार कम किए जाने का दावा किया।उनके बयान से राजनीतिक तनाव बढ़ गया।इंटरव्यू में कई अहम खुलासे सामने आए।इससे देशभर में चर्चा तेज हो गई।
यूनुस पर संविधान तोड़ने के क्या आरोप?
राष्ट्रपति ने कहा कि यूनुस ने संवैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया।विदेश यात्राओं की जानकारी उन्हें नहीं दी गई।कई दौरों के बारे में सूचित नहीं किया गया बताया गया।राष्ट्रपति को सरकारी मामलों से दूर रखा गया।विदेशी समझौतों पर भी चर्चा नहीं हुई।उन्होंने कहा कि उन्हें अंधेरे में रखा गया।इन आरोपों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया।
क्या महल में कैद जैसा माहौल बना?
शाहाबुद्दीन ने कहा कि उन्हें बंगभवन में सीमित रखा गया।उनकी विदेश यात्राओं को रोका गया बताया गया।कोसोवो और कतर यात्राएं मंजूर नहीं हुईं।इस दौरान कई अध्यादेश जारी किए गए।लेकिन राष्ट्रपति को जानकारी नहीं दी गई।उन्होंने स्थिति को कैद जैसा बताया।इस बयान से राजनीतिक हलचल बढ़ी।
क्या पद से हटाने की साजिश बनी?
राष्ट्रपति ने पद से हटाने की कोशिश का दावा किया।उन्होंने कहा कि एक जज को नियुक्त करने की योजना बनी थी।लेकिन संवैधानिक बाधाओं के कारण योजना रुक गई।इस मुद्दे ने नया विवाद खड़ा कर दिया।राजनीतिक वर्ग में बहस तेज हो गई।कई विश्लेषकों ने इसे गंभीर मामला बताया।इससे सरकार पर सवाल उठे।
भयानक रात को लेकर क्या खुलासा?
राष्ट्रपति ने एक घटना का भी जिक्र किया।उन्होंने कहा कि बंगभवन के बाहर भीड़ जुट गई थी।कुछ लोगों ने आवास में घुसने की कोशिश की।स्थिति संभालने के लिए सेना की मदद ली गई।उन्होंने इसे भयानक रात बताया।इस घटना ने सुरक्षा पर भी सवाल खड़े किए।मामला चर्चा का विषय बन गया।
सेना और बीएनपी ने कैसे दिया समर्थन?
राष्ट्रपति ने सेना के सहयोग की बात कही।तीनों सैन्य प्रमुखों ने संवैधानिक प्रक्रिया बनाए रखने में मदद की।बीएनपी ने भी समर्थन दिया बताया गया।राष्ट्रपति ने अपने पद की अहमियत पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि पद कमजोर होना देश के लिए ठीक नहीं।सेना ने स्थिरता बनाए रखने का भरोसा दिया।इससे राजनीतिक संदेश गया।
क्या आगे राजनीतिक टकराव बढ़ सकता है?
इस विवाद से बांग्लादेश की राजनीति में तनाव बढ़ गया है।सरकार और विपक्ष के बीच टकराव की आशंका है।विश्लेषक आने वाले दिनों को महत्वपूर्ण मान रहे हैं।संवैधानिक मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं।राष्ट्रपति के बयान से नया मोड़ आया है।देश में अस्थिरता की चिंता भी दिखी।हालात पर सभी की नजर बनी हुई है।

























