इंटरनेशनल न्यूज. जहांनारा आलम ने कहा कि कई जूनियर खिलाड़ियों ने उनसे निजी तौर पर शिकायतें साझा कीं। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटी गलतियों पर भी सख्त सज़ा दी जाती थी। बताया गया कि माफी मांगने के बाद भी डांट-फटकार और थप्पड़ पड़े। यह व्यवहार कथित तौर पर लंबे समय से जारी बताया गया। खिलाड़ियों में डर का माहौल बनने की बात कही गई। कुछ खिलाड़ियों ने भविष्य को लेकर घबराहट व्यक्त की। आरोप सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई।
बोर्ड ने क्या कहा तुरंत?
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने बयान जारी कर दावे खारिज किए। बोर्ड ने कहा कि किसी खिलाड़ी की आधिकारिक शिकायत नहीं आई। उसने कप्तान और सपोर्ट स्टाफ पर भरोसा जताया। बोर्ड ने मीडिया ट्रायल की संस्कृति पर आपत्ति की। मतभेदों को आंतरिक प्रक्रिया से सुलझाने की बात कही गई। टीम की साख बचाने को प्राथमिकता बताया गया। जरूरत हुई तो तथ्यों की समीक्षा का संकेत दिया गया।
ड्रेसिंग रूम में क्या माहौल?
जहांनारा के अनुसार टूर्नामेंट के दौरान तनाव बढ़ा रहा। गलतियों के डर से खेल पर असर पड़ने की बात कही गई। टीम प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक न होने पर दबाव बढ़ा। कुछ खिलाड़ियों ने खेल छोड़ने तक की बात कही। उन्होंने कहा कि भरोसा और प्रेरणा जरूरी है। सज़ा और चीख-पुकार से प्रदर्शन नहीं सुधरता। सकारात्मक माहौल को सफलता की कुंजी बताया गया।
विदेशी दौरे पर क्या हुआ?
जहांनारा ने दुबई दौरे की एक घटना का जिक्र किया। दावा किया कि एक जूनियर खिलाड़ी को कमरे में बुलाकर थप्पड़ मारा गया। खिलाड़ी रो पड़ी और डर गई, ऐसा आरोप है। टीम छोड़ने के डर से आवाज़ें दब गईं। सहेलियों ने निजी तौर पर चिंता बताई। उन्होंने कहा कि सुरक्षित माहौल हर खिलाड़ी का अधिकार है। सम्मान के बिना सीखना संभव नहीं बताया गया।
मानसिक स्वास्थ्य चिंता क्यों बढ़ी?
जहांनारा ने कहा कि उन्होंने मानसिक कारणों से ब्रेक लिया। लगातार दबाव और डर ने थका दिया, ऐसा उनका कहना है। कई खिलाड़ी चुपचाप तनाव झेल रही हों, यह आशंका जताई। ध्यान भटकने से ट्रेनिंग और मैच दोनों प्रभावित होते हैं। सपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत बताई गई। काउंसलिंग और हेल्पलाइन की मांग उठी। युवा खिलाड़ियों के लिए मेंटरशिप पर जोर दिया गया।
कप्तान की तरफ़ से क्या?
कप्तान निगार सुल्ताना की विस्तृत प्रतिक्रिया अब तक नहीं आई। टीम से जुड़े सूत्र अनुशासन और ढांचे की बात कहते हैं। समर्थक चाहते हैं कि टीम प्रदर्शन पर फोकस करे। आलोचक कहते हैं कि अनुशासन का मतलब हिंसा नहीं हो सकता। पारदर्शी तरीके से तथ्यों की जांच जरूरी बताई जा रही। दोनों पक्षों को सुनना निष्पक्षता की शर्त है। जवाबदेही से विश्वास लौटता है, यही तर्क दिया गया।
आगे का रास्ता क्या होगा?
पूर्व खिलाड़ियों और प्रशंसकों ने स्वतंत्र समीक्षा की मांग रखी। निष्पक्ष पैनल बने तो भरोसा लौट सकता है। खिलाड़ी सुरक्षित महसूस करें, यह सबसे जरूरी माना गया। बोर्ड का अगला कदम माहौल तय करेगा। जरूरत पड़ी तो आचार संहिता कड़ी करनी होगी। शिकायत तंत्र सरल और गोपनीय बनाने की सलाह दी गई। लक्ष्य स्पष्ट है—टीम, सम्मान और प्रदर्शन की रक्षा।

























