चीन के शहर तेज़ी से फैले और लोगों की आय बढ़ी। काम का दबाव बढ़ा तो सामाजिक पीना आम हुआ। दफ्तर की मीटिंगों में टोस्ट संस्कृति आई। दोस्ती और नेटवर्किंग में ड्रिंक्स जुड़ गए। विज्ञापनों ने “कूल लाइफस्टाइल” बेचा। त्योहारों की गिफ्टिंग में शराब शामिल हुई। यही सब मिलकर बिक्री को ऊपर ले गया।
सरकार ने क्या चाल चली?
सरकार ने लाइसेंसिंग और लॉजिस्टिक्स को साधा। बड़े शहरों में मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन बना। स्थानीय ब्रांडों को वित्त और प्रचार मिला। क्वालिटी मानकों पर सख्ती बढ़ाई गई। टैक्स ढांचे में स्थिरता से भरोसा बढ़ा। उद्योग मेलों से निवेश आकर्षित हुआ। पूरी चेन सुव्यवस्थित होकर तेज़ चली।
बाईजिउ से प्रीमियम क्यों मुड़ा?
युवा पीढ़ी ने हल्के स्वाद चुने। वाइन, क्राफ्ट बीयर और व्हिस्की लोकप्रिय हुई। विदेशी लेबल “स्टेटस” का संकेत बने। प्रीमियम बोतलों में मार्जिन अधिक रहा। बार मेन्यू में नये कॉकटेल आए। ब्रांड स्टोरीटेलिंग ने पहचान बनाई। नतीजा, मांग महंगी रेंज की तरफ गई।
ऑनलाइन ने खेल पलटा कैसे?
ई-कॉमर्स ऐप्स ने घर तक डिलीवरी दी। एक क्लिक में ऑफर और कूपन मिले। लाइव-स्ट्रीम में टेस्टिंग और रिव्यू चले। छोटे कस्बों तक सप्लाई चैन पहुँची। ब्रांड-स्टोर्स ने सिग्नेचर कलेक्शन बेचे। कस्टमर डेटा से टार्गेटिंग तेज हुई। ऑनलाइन शेयर ने कुल बाजार बढ़ाया।
अमेरिका की रफ़्तार कैसी अब?
अमेरिका में बार संस्कृति मजबूत रही। बीयर और व्हिस्की की मांग ऊंची है। पर जनसंख्या स्केल चीन जैसा नहीं। प्रीमियम ग्रोथ है पर सीमित गति। ब्रांड लड़ाई स्वाद और अनुभव पर है। स्थानीय क्राफ्ट ब्रुअरीज प्रभावी बनीं। कुल मिलाकर चीन आगे दिखता है।
भारत कहाँ ठहरता दिखा आज?
भारत में टैक्स भार काफ़ी ज्यादा है। राज्यों की नीतियाँ अलग-अलग चलती हैं। फिर भी खपत अब ग्रामीण तक पहुँची। सामाजिक और धार्मिक कारणों से रोक रहती। संगठित रिटेल अभी विस्तार में है। प्रीमियम सेगमेंट शहरों में तेज़ है। भारत बढ़ रहा, पर संतुलित कदमों से।
कल की दिशा किधर जाएगी?
प्रीमियम और “कम-शुगर” विकल्प बढ़ेंगे। नॉन-एल्कोहोलिक स्पिरिट्स भी जगह लेंगी। हेल्थ चेतना से जिम्मेदार पीना उभरेगा। पैकेजिंग स्थिरता पर फोकस होगा। टेक से आयु-चेक और ट्रेसेबिलिटी सुधरेगी। ग्लोबल ब्रांड साझेदारियाँ गहरी होंगी। अंततः मांग और नीति मिलकर रास्ता तय करेंगी।

























