अमेरिकी सेना के अंदर एक नया विवाद सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान से जुड़े युद्ध की तैयारी पर एक ब्रीफिंग हुई थी। उसी बैठक में कुछ धार्मिक बातें कही गईं। आरोप है कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने युद्ध को ईश्वर की योजना बताया। यह टिप्पणी एक आधिकारिक सैन्य बैठक में की गई थी। इससे कई सैनिक असहज हो गए। मामला सामने आने के बाद चर्चा तेज हो गई है। अब इस पर सवाल उठने लगे हैं।
क्या ट्रंप को ‘जीसस का चुना’ बताया गया?
रिपोर्ट के अनुसार उस ब्रीफिंग में डोनाल्ड ट्रंप का जिक्र भी किया गया। आरोप है कि अधिकारी ने कहा कि ट्रंप को जीसस ने चुना है। यह भी कहा गया कि ईरान में चल रहा संघर्ष ईश्वर की योजना का हिस्सा है। सैनिकों का कहना है कि ऐसी बातें सैन्य बैठक में कही गईं। इससे कई लोगों ने आपत्ति जताई। क्योंकि सेना में धार्मिक टिप्पणी को संवेदनशील माना जाता है।
आखिर शिकायत किसने की?
इस पूरे मामले की जानकारी मिलिट्री रिलिजियस फ्रीडम फाउंडेशन ने दी है। यह संस्था अमेरिकी सेना में धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दों पर काम करती है। संस्था का कहना है कि उन्हें कई सैनिकों से शिकायतें मिली हैं। रिपोर्ट के अनुसार करीब 200 सैनिकों ने चिंता जताई है। ये सैनिक अलग-अलग सैन्य ठिकानों से जुड़े बताए जा रहे हैं। शिकायत के बाद मामला चर्चा में आ गया है।
क्या बाइबल के उद्धरण भी दिए गए?
शिकायत में कहा गया है कि उस बैठक में बाइबल का भी जिक्र हुआ। खास तौर पर ‘बुक ऑफ रिवेलेशन’ का हवाला दिया गया। यह बाइबल का आखिरी हिस्सा है। इसमें दुनिया के अंतिम युद्ध यानी आर्मगेडन का जिक्र मिलता है। सैनिकों का आरोप है कि अधिकारी ने इसी संदर्भ में ईरान युद्ध को जोड़ा। इससे कई लोग हैरान रह गए।
क्या सैनिकों ने जताई नाराजगी?
कुछ सैनिकों का कहना है कि सेना में इस तरह की भाषा ठीक नहीं है। उनका मानना है कि युद्ध और धर्म को इस तरह जोड़ना खतरनाक हो सकता है। कई सैनिकों ने अपनी पहचान गुप्त रखकर शिकायत की है। एक नॉन-कमिशन्ड ऑफिसर ने भी अपनी यूनिट की ओर से बयान दिया है। उसका कहना है कि ऐसी टिप्पणियां सैनिकों के बीच असहज माहौल बना सकती हैं।
क्या विशेषज्ञों ने जताई चिंता?
इस मामले पर विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है। मिलिट्री रिलिजियस फ्रीडम फाउंडेशन के अध्यक्ष माइकी वाइनस्टीन ने इसे खतरनाक बताया। उनका कहना है कि ऐसी भाषा से कट्टरपंथी संगठनों को प्रचार का मौका मिल सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय तनाव भी बढ़ सकता है। इसलिए सेना में ऐसी टिप्पणियों से बचना जरूरी है।
क्या इससे नया विवाद खड़ा होगा?
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पहले ही काफी बढ़ा हुआ है। ऐसे समय में सेना के अंदर इस तरह की बातें सामने आना नया विवाद खड़ा कर सकता है। आलोचकों का कहना है कि सेना को राजनीतिक और धार्मिक विवादों से दूर रहना चाहिए। फिलहाल यह मामला चर्चा में है। आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
























