नई दिल्ली. विदेश मंत्री एस जयशंकर की अमेरिका यात्रा से पहले भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने शीर्ष अमेरिकी राजनयिकों के साथ द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। इन बैठकों का उद्देश्य भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करना था। विदेश मंत्रालय ने घोषणा की कि जयशंकर 24 से 29 दिसंबर तक अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान वे अमेरिकी समकक्षों के साथ प्रमुख मुद्दों पर बातचीत करेंगे। विदेश मंत्री की इस यात्रा को भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है।
विक्रम मिस्री की बैठकें
जयशंकर की यात्रा से पहले, विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार को वॉशिंगटन डीसी स्थित विदेश विभाग के मुख्यालय में उप विदेश मंत्री कर्ट कैंपबेल और प्रबंधन उप मंत्री रिचर्ड वर्मा से मुलाकात की। इन बैठकों में अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा भी उपस्थित थे। रिचर्ड वर्मा ने बैठक के बाद कहा, “हम आपसी विश्वास और साझा मूल्यों के आधार पर भारत-अमेरिका संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
व्यापार और रक्षा संबंधों में प्रगति
वर्मा ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2000 में 20 अरब डॉलर था, जो 2023 में 195 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसी अवधि में रक्षा व्यापार भी शून्य से बढ़कर 24 अरब डॉलर हो गया। उम्मीद है कि 2024 में यह व्यापार 200 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर जाएगा।
भारतीय प्रवासियों की बढ़ती भूमिका
अमेरिका में भारतीय प्रवासियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। 2000 में यह संख्या 1.9 मिलियन थी, जो अब पांच मिलियन से अधिक हो चुकी है। भारतीय छात्रों की संख्या भी 2000 में 54,664 से बढ़कर 2023 में 3,30,000 हो गई है। वर्मा ने यह भी बताया कि अमेरिका में 20% से अधिक यूनिकॉर्न कंपनियों के संस्थापक या सह-संस्थापक भारतीय मूल के हैं।
वाणिज्य दूतावासों का विस्तार
भारत और अमेरिका के बीच राजनयिक संबंधों को और सुदृढ़ करने के लिए दोनों देश नए वाणिज्य दूतावास खोलने की योजना बना रहे हैं। अमेरिका लॉस एंजिल्स और बोस्टन में भारतीय वाणिज्य दूतावास खोलेगा, जबकि भारत बेंगलुरु और अहमदाबाद में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास खोलेगा।























