होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया की सबसे अहम समुद्री राह माना जाता है।फारस की खाड़ी से निकलने वाला ज्यादातर तेल इसी रास्ते से गुजरता है।हर दिन हजारों जहाज इस संकरे रास्ते से निकलते हैं।सऊदी अरब, कुवैत, इराक और यूएई का तेल भी इसी रास्ते से बाहर जाता है।भारत, चीन और जापान जैसे देश इसी सप्लाई पर निर्भर हैं।अगर यह रास्ता बंद हुआ तो पूरी दुनिया प्रभावित हो सकती है।इसी वजह से इसे वैश्विक ऊर्जा की नस कहा जाता है।
ईरान का नया बयान क्यों आया?
ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपने पहले बड़े संदेश में सख्त बात कही है।उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहना चाहिए।साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका के सैन्य ठिकाने क्षेत्र में सक्रिय रहे तो उन पर हमला हो सकता है।यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव पहले से बढ़ा हुआ है।इस बयान ने कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।कई विशेषज्ञ इसे वॉशिंगटन और तेल अवीव के लिए सीधा संदेश मान रहे हैं।
किन देशों पर पड़ेगा असर?
अगर होर्मुज का रास्ता बंद होता है तो सबसे पहले तेल बाजार प्रभावित होगा।सऊदी अरब, कतर, कुवैत और इराक जैसे देशों का निर्यात रुक सकता है।इन देशों की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा तेल व्यापार पर टिका है।दूसरी तरफ भारत, चीन और जापान जैसे देशों को मुश्किल आ सकती है।इन देशों को अचानक महंगा तेल खरीदना पड़ सकता है।यूरोप के कई देश भी ऊर्जा संकट झेल सकते हैं।इसलिए यह मामला पूरी दुनिया के लिए चिंता बन सकता है।
क्या यह असली योजना है?
कई विश्लेषक इस बयान को काफी कड़ा मान रहे हैं।उनका कहना है कि इतनी बड़ी समुद्री राह को बंद करना आसान नहीं होता।इससे सिर्फ विरोधी देश ही नहीं बल्कि कई सहयोगी देश भी प्रभावित होंगे।कुछ विशेषज्ञ इसे दबाव बनाने की रणनीति बता रहे हैं।जबकि कुछ का मानना है कि यह युद्ध के माहौल की भावनात्मक प्रतिक्रिया हो सकती है।युद्ध के समय नेताओं के बयान अक्सर ज्यादा तीखे हो जाते हैं।इसलिए अभी साफ नहीं है कि यह चेतावनी है या असली योजना।
क्या ट्रंप की नीति जिम्मेदार?
मिडिल ईस्ट का तनाव अचानक पैदा नहीं हुआ है।कई विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका की सख्त नीति ने हालात को और जटिल बना दिया है।मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।सैन्य दबाव और आर्थिक प्रतिबंध लगातार बढ़ाए गए हैं।इससे दोनों पक्षों के बीच टकराव गहरा हुआ है।अब ईरान भी खुलकर जवाब देने की भाषा बोल रहा है।इसी वजह से क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है।
दुनिया की सांस क्यों अटकी?
होर्मुज जलडमरूमध्य को कई लोग दुनिया की ऊर्जा नस कहते हैं।दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।अगर यह रास्ता बंद हुआ तो तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं।कई देशों में महंगाई बढ़ सकती है।वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ेगा।इसलिए दुनिया के बड़े देश इस बयान को बेहद गंभीरता से देख रहे हैं।
आगे क्या हो सकता है?
अब सबकी नजर आने वाले दिनों पर टिकी है।क्या ईरान सच में इस समुद्री रास्ते को बंद करने की कोशिश करेगा।या यह सिर्फ रणनीतिक दबाव बनाने का तरीका है।अमेरिका और उसके सहयोगी देश भी चुप नहीं बैठेंगे।अगर टकराव बढ़ा तो समुद्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो सकती हैं।फिलहाल दुनिया उम्मीद कर रही है कि कूटनीति रास्ता निकाले।क्योंकि इस रास्ते के बंद होने का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।

























