मिडिल ईस्ट में जंग का असर अब समुद्री रास्तों पर दिख रहा है।ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सख्त फैसला लिया है।इस रास्ते से दुनिया का बड़ा तेल कारोबार गुजरता है।ईरान ने कहा कि पश्चिमी देशों के जहाज यहां से नहीं गुजर पाएंगे।यह घोषणा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने की।सरकारी प्रसारक आईआरआईबी के जरिए दुनिया को यह संदेश दिया गया।इस फैसले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है।
क्या पश्चिमी जहाज होंगे निशाने?
आईआरजीसी ने साफ कहा कि यह फैसला युद्ध की स्थिति में लिया गया है।ईरान के मुताबिक होर्मुज पर नियंत्रण उसका अधिकार है।उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाज निशाने पर होंगे।यूरोप और उनके सहयोगियों के जहाज भी खतरे में बताए गए हैं।सरकारी मीडिया ने इस बयान को प्रमुखता से दिखाया।इससे समुद्री व्यापार में डर का माहौल बन गया है।कई जहाज अब रास्ता बदलने की सोच रहे हैं।
क्या भारत पर असर नहीं?
रिपोर्टों के मुताबिक भारत के जहाजों पर फिलहाल कोई रोक नहीं है।ईरान ने अपना निशाना खास तौर पर पश्चिमी देशों को बताया है।भारत लंबे समय से ईरान के साथ संतुलित रिश्ते बनाए हुए है।ऊर्जा जरूरतों के कारण भारत इस इलाके पर नजर रखे हुए है।अगर रास्ता खुला रहा तो भारत की सप्लाई जारी रह सकती है।हालांकि हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हैं।इसलिए सरकार लगातार स्थिति पर नजर रख रही है।
क्या चीन को मिली छूट?
ईरान ने एक और संकेत दिया है जिसने दुनिया का ध्यान खींचा।रिपोर्टों में कहा गया कि चीनी झंडे वाले जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जा सकती है।इसे बीजिंग के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।चीन मिडिल ईस्ट से बड़ा तेल खरीदार है।इसलिए उसके लिए रास्ता खुला रहना अहम माना जा रहा है।अगर ऐसा होता है तो ऊर्जा बाजार में नई रणनीति बन सकती है।दुनिया के कई देश इस फैसले को ध्यान से देख रहे हैं।
क्या वैश्विक तेल बाजार हिला?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में गिना जाता है।दुनिया का करीब पांचवां हिस्सा तेल इसी रास्ते से गुजरता है।अगर यह रास्ता रुकता है तो असर सीधे तेल की कीमतों पर पड़ता है।जंग के बाद कई जहाजों ने सफर रोक दिया है।कंपनियां अब दूसरे रास्ते तलाश रही हैं।इससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है।ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ती जा रही है।
क्या जहाजों की लंबी कतार?
लाइव ट्रैकिंग सिस्टम से एक नई तस्वीर सामने आई है।कुवैत और दुबई के पास सैकड़ों जहाज खड़े दिखाई दे रहे हैं।कई जहाज कप्तान जोखिम लेने से बच रहे हैं।ईरान का अपना बेड़ा भी बंदर अब्बास के पास लंगर डाले खड़ा है।यह नजारा समुद्री व्यापार में आई रुकावट दिखाता है।विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो संकट और बढ़ेगा।
क्या आगे और बढ़ेगा संकट?
इतिहास बताता है कि होर्मुज को पूरी तरह बंद करना दुर्लभ है।1980 से 1988 के ईरान-इराक युद्ध में भी तेल टैंकर चलते रहे थे।लेकिन इस बार हालात ज्यादा तनावपूर्ण दिख रहे हैं।दुनिया की बड़ी ताकतें भी सतर्क हैं।अगर यह संकट लंबा चला तो वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस जलडमरूमध्य पर टिकी है।
























