होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों से युद्धपोत भेजने को कहा था, लेकिन कई देशों ने इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं दी।
क्या ट्रंप की अपील असरहीन रही?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य फिर चर्चा में आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों से सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने का आग्रह किया था। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। लेकिन कई देशों ने इस प्रस्ताव पर खुलकर समर्थन नहीं दिया।
जापान ने क्यों किया इंकार?
जापान ने इस मुद्दे पर साफ रुख अपनाया है। वहां की सरकार ने कहा कि वह सीधे तौर पर युद्धपोत भेजने के पक्ष में नहीं है। जापान का मानना है कि इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है। जापान के मध्य-पूर्व के साथ आर्थिक संबंध भी हैं। इसलिए वह किसी सैन्य टकराव से दूरी रखना चाहता है।
अन्य देश क्यों हिचकिचा रहे?
जापान के अलावा कई अन्य देश भी सावधानी बरत रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया और तुर्की जैसे देशों ने भी खुलकर समर्थन नहीं दिया। उनका मानना है कि मध्य-पूर्व पहले से ही संवेदनशील क्षेत्र है। ऐसे में सैन्य तैनाती हालात को और बिगाड़ सकती है।
ट्रंप ने क्या दी चेतावनी?
डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा देश अमेरिका के अनुरोध को ठुकराता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सहयोगी देश मदद करते हैं तो अच्छा है। नहीं करते तो अमेरिका अपने तरीके से काम करेगा।
दक्षिण कोरिया का क्या रुख?
दक्षिण कोरिया ने अभी अंतिम फैसला नहीं किया है। वहां की सरकार का कहना है कि वह स्थिति पर नजर रखे हुए है। क्षेत्रीय हालात और वैश्विक राजनीति को देखते हुए ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। यहां से रोजाना लाखों बैरल तेल गुजरता है। अगर यहां कोई टकराव होता है तो वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हो सकता है।
क्या बढ़ सकता है तनाव?
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और गंभीर हो सकता है। यदि सहयोगी देश समर्थन नहीं देते तो अमेरिका अलग रणनीति अपना सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस समुद्री मार्ग पर टिकी हुई है।

























