इंटरनेशनल. भारत और ऑस्ट्रेलिया ने मंगलवार को आधिकारिक रूप से ‘नवीकरणीय ऊर्जा साझेदारी’ (Renewable Energy Partnership) की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में आपसी निवेश को बढ़ावा देना है। यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बानीस के बीच हुई वार्ता के बाद की गई। दोनों नेताओं के बीच यह वार्ता G20 सम्मेलन के दौरान रियो डी जनेरियो में हुई, जिसमें उन्होंने भारत-ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
साझेदारी का उद्देश्य और क्षेत्रों की पहचान
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने इस साझेदारी के माध्यम से सौर ऊर्जा, हरा हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण, और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में आपसी निवेश को बढ़ाने की दिशा में काम करने का संकल्प लिया है। इसके अलावा, दोनों देशों ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए कौशल प्रशिक्षण में सुधार करने और भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा कार्यबल को सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। दोनों नेताओं ने इसे जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त कार्रवाई के तौर पर देखा और इसे महत्वपूर्ण कदम माना।
सैन्य और सुरक्षा सहयोग
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। दोनों देशों ने संयुक्त रक्षा और सुरक्षा सहयोग समझौते को 2025 में नवीनीकरण और सुदृढ़ करने का संकल्प लिया। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के सामरिक संबंधों को मजबूती प्रदान करना और क्षेत्रीय शांति तथा सुरक्षा में योगदान देना है। इसके तहत समुद्री सुरक्षा सहयोग और आपसी रक्षा जानकारी साझा करने पर भी जोर दिया गया।
क्षेत्रीय और वैश्विक सहयोग
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए एक खुले, समावेशी और सुरक्षित क्षेत्र का समर्थन किया। दोनों नेताओं ने अंतर्राष्ट्रीय कानून और समुद्री अधिकारों की रक्षा पर भी ध्यान केंद्रित किया, खासकर संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देश अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता को लेकर भी सहमत हैं।
भारतीय समुदाय के लिए कदम
ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय की अहम भूमिका को देखते हुए, मोदी ने प्रधानमंत्री अल्बानीस से भारतीय समुदाय, विशेष रूप से भारतीय छात्रों के हितों के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि की। इसके अलावा, बेंगलुरु में ऑस्ट्रेलियाई वाणिज्य दूतावास और ब्रिस्बेन में भारतीय वाणिज्य दूतावास के उद्घाटन से दोनों देशों के बीच व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूती मिलेगी।























