नई दिल्ली और डबलिन के रिश्ते पहले भी मजबूत रहे हैं, लेकिन इस मुलाकात ने इन रिश्तों को और गहरा करने का मौका दिया। राजदूत अखिलेश मिश्र लंबे समय से राष्ट्रपति हिगिंस की कविताओं और विचारों से प्रभावित रहे हैं। उन्होंने उनकी कविताओं में भारतीय दर्शन की झलक पर एक किताब भी लिखी है। यह मुलाकात सिर्फ़ औपचारिक नहीं थी बल्कि दिल से दिल की बातचीत थी। दोनों के बीच संस्कृति, समाज और मानव मूल्यों की चर्चा हुई। इस बातचीत ने दोनों देशों के बीच भरोसा और करीब लाया। यह मुलाकात भारत-आयरलैंड संबंधों का नया अध्याय साबित हो रही है।
काव्य और दर्शन की गूंज कहाँ मिली?
राष्ट्रपति हिगिंस एक राजनेता के साथ-साथ एक संवेदनशील कवि भी माने जाते हैं। उनकी कविताओं में समाज, मानवता और जीवन के गहरे सवाल दिखाई देते हैं। राजदूत मिश्र ने उनकी कविताओं में वैदिक दर्शन से जुड़ी भावना देखी है। यही चर्चा इस मुलाकात में भी सामने आई। दोनों ने इस बात पर सहमति जताई कि साहित्य और विचार मनुष्यों को जोड़ने का सबसे मजबूत पुल है। बातचीत की यह दिशा मुलाकात को और अर्थपूर्ण बनाती है। इससे राजनीतिक नहीं, सांस्कृतिक विश्वास मजबूत होता है।
भारतीय समुदाय को लेकर क्या संदेश?
राष्ट्रपति हिगिंस ने पहले भी आयरलैंड में भारतीय समुदाय पर हुए हमलों की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि भारतीयों ने आयरलैंड के समाज और अर्थव्यवस्था में सुंदर योगदान दिया है। इस मुलाकात में भी उन्होंने भारतीयों के प्रति आदर और सम्मान जताया। राजदूत मिश्र ने इस भाव के लिए उनका धन्यवाद किया। यह संवाद दोनों देशों के लोगों के बीच मानवीय रिश्तों को मजबूत करता है। इससे यह संदेश गया कि दोनों देश एक-दूसरे के लोगों को अपनाते हैं। इसे दिल का रिश्ता कहा जा सकता है।
खाद्य सुरक्षा और बाजरा पर क्यों चर्चा हुई?
बातचीत में भोजन और स्वास्थ्य पर भी चर्चा हुई, खासकर बाजरा और पारंपरिक अनाजों के महत्व पर। राष्ट्रपति हिगिंस इन फसलों को बढ़ावा देने के समर्थक रहे हैं। राजदूत मिश्र ने उन्हें बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल से वर्ष 2023 अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष घोषित किया गया। इससे दुनिया में भारत की कृषि सोच को पहचान मिली। दोनों ने सहमति जताई कि पोषण और कृषि विविधता दुनिया के भविष्य की जरूरत है। यह विषय आज के समय में बहुत महत्वपूर्ण है। इससे किसान और आम जनता दोनों को लाभ मिल सकता है।
भाषा और पहचान का मुद्दा कहाँ जुड़ा?
राष्ट्रपति हिगिंस ने आयरलैंड के पहले संस्कृति मंत्री रहते हुए आयरिश भाषा को यूरोपीय संघ में आधिकारिक दर्जा दिलाया था। यह भाषा संरक्षण की ऐतिहासिक सफलता मानी जाती है। राजदूत मिश्र ने कहा कि भारत की नई शिक्षा नीति भी भारतीय भाषाओं को बढ़ावा दे रही है। भाषा सिर्फ बोलने का माध्यम नहीं, पहचान और संस्कृति की जड़ होती है। दोनों ने कहा कि भाषा के संरक्षण से देश की आत्मा बची रहती है। यह बातचीत दोनों देशों के सांस्कृतिक दृष्टिकोण का मेल साबित हुई। इससे भाषा सम्मान का संदेश गया।
दुनिया को क्या संदेश दिया गया?
राष्ट्रपति हिगिंस ने सामाजिक और आर्थिक समानता पर काम जारी रखने की इच्छा जताई। उन्होंने सहयोग, मित्रता और मानवता को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। राजदूत मिश्र ने इस सोच की सराहना की। उन्होंने कहा कि जब दुनिया में विभाजन बढ़ रहा है, तब इस तरह की सोच उम्मीद की रोशनी है। मुलाकात के अंत में राष्ट्रपति ने भारत के लोगों के लिए शुभकामनाएं भेजीं। यह संदेश दिल से निकला और दिल तक पहुँचा। इससे दोनों देशों के बीच विश्वास और मजबूत हो गया।

























