ईरान में हाल के दिनों में सत्ता परिवर्तन की अटकलें तेज हुई हैं। कुछ रिपोर्टों में सुप्रीम लीडर को हटाने की बातें कही गईं। इन चर्चाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी। लेकिन ईरान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्री ने कहा कि यह सब ख्याली पुलाव है। सिस्टम मजबूत है। बाहरी दबाव असर नहीं डाल सकता। ईरान के सेना प्रमुख अमीर हातमी ने बताया कि हालात को देखते हुए सेना अलर्ट पर है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधि बढ़ी है। इजरायल से भी खतरे की आशंका जताई गई है। ईरान ने कहा कि उसकी सेनाएं पूरी तरह तैयार हैं। हर मोर्चे पर निगरानी बढ़ा दी गई है। किसी भी हमले का जवाब तय है।
अमेरिका को ईरान की चेतावनी क्या है?
सेना प्रमुख ने अमेरिका को सीधे चेताया है। कहा गया कि अगर कोई आक्रामक कदम उठाया गया। तो उसका गंभीर जवाब दिया जाएगा। इससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है। इजरायल की सुरक्षा भी दांव पर लग सकती है। ईरान ने साफ कहा कि वह पीछे हटने वाला नहीं है। संदेश पूरी तरह स्पष्ट है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि कुछ लोग भ्रम में जी रहे हैं। उनका मानना है कि ईरान की सत्ता गिराई जा सकती है। यह सोच गलत है। ईरान की राजनीतिक व्यवस्था मजबूत है। अंदरूनी हालात नियंत्रण में हैं। किसी को गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए। तेहरान पूरी तरह सतर्क है।
क्या ईरान अमेरिका से बातचीत को तैयार है?
तनाव के बावजूद ईरान ने बातचीत का रास्ता बंद नहीं किया है। अराघची ने कहा कि ईरान संतुलित कूटनीति में विश्वास करता है। बातचीत सम्मान के आधार पर होनी चाहिए। धमकी की भाषा स्वीकार नहीं होगी। पहले से नतीजा तय नहीं किया जा सकता। बराबरी जरूरी है। तभी संवाद संभव है। ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद हालात बिगड़े। अमेरिका ने ईरानी सरकार पर हिंसा का आरोप लगाया। डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हमले के संकेत दिए गए। तेहरान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। ईरान ने कहा कि अशांति के पीछे विदेशी ताकतें हैं। बयानबाजी से हालात और बिगड़े।
आगे के दिनों में स्थिति कितनी संवेदनशील है?
अमेरिका ने ईरान के आसपास सैन्य जहाज तैनात किए हैं। इससे हमले की आशंका बढ़ी है। ईरान ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। दोनों तरफ बयान कड़े हैं। हालात नाजुक बने हुए हैं। आने वाले दिन अहम होंगे। दुनिया की नजर मिडिल ईस्ट पर टिकी है।

























