ईरान ने बड़ा संकेत दिया है। होर्मुज जलडमरुमध्य जल्द खुल सकता है। यह दुनिया का अहम तेल रूट है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल गुजरता है। हालात लंबे समय से तनावपूर्ण थे। अब सुधार की उम्मीद दिख रही है। इससे कई देशों को राहत मिल सकती है।
क्या नया प्रोटोकॉल तैयार हो रहा?
ईरान इस समय एक नया सिस्टम बना रहा है। इसे प्रोटोकॉल कहा जा रहा है। इसका मकसद जहाजों की निगरानी करना है। हर जहाज की गतिविधि पर नजर रहेगी। ड्राफ्ट लगभग तैयार बताया गया है। मंजूरी के बाद इसे लागू किया जाएगा। इसके लिए ओमान के साथ बात चल रही है।
क्या ईरान-ओमान मिलकर काम करेंगे?
इस योजना में ओमान भी शामिल है। दोनों देश मिलकर सिस्टम चलाएंगे। जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित किया जाएगा। इससे ट्रैफिक बेहतर तरीके से चलेगा। सुरक्षा भी बढ़ेगी। तेल सप्लाई में रुकावट कम होगी। यह वैश्विक बाजार के लिए अहम है।
क्या यह नियंत्रण या सुविधा सिस्टम है?
ईरान ने साफ किया है कि यह पाबंदी नहीं है। इसका मकसद सुरक्षा और व्यवस्था है। जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिलेगा। बेहतर समन्वय किया जाएगा। इसे एक तरह का मैनेजमेंट सिस्टम माना जा रहा है। इससे व्यापार आसान हो सकता है।
क्या हालात बदलने से नियम बदले?
ईरान का कहना है कि हालात सामान्य नहीं हैं। क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। पुराने नियम अब काम नहीं कर रहे। इसलिए नया ढांचा जरूरी है। ओमान ने खुलकर कुछ नहीं कहा है। लेकिन बातचीत जारी है। दोनों देश मिलकर फ्रेमवर्क तैयार कर रहे हैं।
किन देशों को मिलेगा फायदा?
ईरान ने पांच देशों का नाम लिया है। इनमें भारत, रूस और चीन शामिल हैं। साथ ही इराक और पाकिस्तान भी हैं। इन देशों के जहाजों को प्राथमिकता मिलेगी। इससे भारत के लिए राहत की खबर है। खासकर तेल सप्लाई के लिहाज से।
क्या सभी देशों को मिलेगी अनुमति?
ईरान ने साफ किया है कि सभी को इजाजत नहीं होगी। कुछ देशों को बाहर रखा जाएगा। अमेरिका और इजरायल के जहाज शामिल नहीं होंगे। उनके सहयोगियों पर भी रोक लग सकती है। इससे साफ है कि फैसला रणनीतिक है। इसका असर आगे दिखेगा।
























