फारस की खाड़ी में एक बार फिर हालात गर्म होते दिख रहे हैं। ईरान की इस्लामिकरिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दो विदेशी ऑयल टैंकर अपने कब्जे में ले लिए हैं।ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक यह कार्रवाई ईंधन तस्करी के आरोप में की गई है।अभी तक यह साफ नहीं किया गया है कि ये जहाज किस देश के हैं।इन जहाजों पर कौन सा झंडा लगा था इसकी भी जानकारी नहीं दी गई।इस कदम से क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर एक बार फिर फारस की खाड़ी पर टिक गई है।
टैंकर कहां से और कैसे पकड़े गए?
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के क्षेत्रीय कमांडर ने बताया कि दोनों टैंकर फारसी द्वीप के पास से जब्त किए गए।यह इलाका पहले से ही संवेदनशील माना जाता है।इन टैंकरों में करीब दस लाख लीटर ईंधन भरा हुआ था।इसमें डीजल भी शामिल बताया जा रहा है।कार्रवाई के बाद दोनों जहाजों को ईरान के बुशहर बंदरगाह पर पहुंचाया गया।ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जांच की प्रक्रिया जारी है।इस कार्रवाई को अवैध ईंधन तस्करी रोकने से जोड़कर देखा जा रहा है।
पंद्रह क्रू मेंबर हिरासत में क्यों?
दोनों टैंकरों पर कुल पंद्रह क्रू सदस्य सवार थे।इन सभी को ईरानी न्यायिक अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया है।अब तक इन लोगों की राष्ट्रीयता सार्वजनिक नहीं की गई है।उनके पासपोर्ट और पहचान से जुड़ी जानकारी भी सामने नहीं आई है।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पूछताछ तेजी से चल रही है।ईरानी प्रशासन का कहना है कि कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई होगी।इस हिरासत ने कई देशों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
क्या यह पहली ऐसी कार्रवाई है?
ईरान ने हाल के महीनों में इस समुद्री क्षेत्र में कई बार ऐसे कदम उठाए हैं।दिसंबर में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक विदेशी टैंकर जब्त किया गया था।उस मामले में सोलह क्रू सदस्यों को पकड़ा गया था।नवंबर में भी इसी समुद्री रास्ते पर एक और जहाज को कब्जे में लिया गया था।ईरान हर बार इसे ईंधन तस्करी के खिलाफ कार्रवाई बताता है।लेकिन पश्चिमी देश इन घटनाओं को अलग नजरिए से देखते हैं।इसी वजह से हर घटना तनाव को और बढ़ा देती है।
पश्चिमी देश ईरान पर क्या आरोप लगाते हैं?
पश्चिमी देशों ने 2019 से ईरान पर टैंकरों पर हमले के आरोप लगाए हैं।2021 में इजरायल से जुड़े एक टैंकर पर ड्रोन हमला हुआ था।उस हमले में दो यूरोपीय नागरिकों की मौत हो गई थी।हालांकि ईरान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।ईरान का कहना है कि ये आरोप राजनीतिक दबाव बनाने के लिए लगाए जाते हैं।इसके बावजूद संदेह और तनाव बना रहता है।इससे क्षेत्र की स्थिति और संवेदनशील हो जाती है।
परमाणु समझौते के बाद क्या बदला?
2015 के परमाणु समझौते से अमेरिका के बाहर आने के बाद हालात और बिगड़ गए।इसके बाद फारस की खाड़ी में ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ीं।ईरान और पश्चिमी देशों के बीच भरोसे की कमी साफ दिखती है।हर नई घटना पुराने विवादों को फिर हवा दे देती है।समुद्री मार्गों की सुरक्षा बड़ा मुद्दा बन चुकी है।इसका असर सीधे वैश्विक व्यापार पर पड़ता है।तेल आपूर्ति को लेकर चिंता लगातार बनी रहती है।
दुनिया की नजर इस इलाके पर क्यों रहती है?
फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम हैं।यहां से रोजाना लाखों बैरल कच्चा तेल गुजरता है।इस इलाके में छोटी सी घटना भी वैश्विक बाजार को प्रभावित कर सकती है।इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय समुदाय हर गतिविधि पर नजर रखता है।दो टैंकरों की जब्ती ने चिंता और बढ़ा दी है।आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।फिलहाल फारस की खाड़ी एक बार फिर सुर्खियों में है।























