म्यूनिख में दुनिया के बड़े नेता जुटे थे। वहीं कीर स्टारमर ने साफ बात कही। उन्होंने कहा कि रूस की मंशा कमजोर नहीं हुई। यूक्रेन युद्ध के बाद हालात बदले हैं। लेकिन खतरा खत्म नहीं हुआ। उन्होंने यूरोप को सावधान रहने को कहा। अब दूसरों पर निर्भर रहने का समय नहीं है। स्टारमर ने कहा कि अगर यूक्रेन में शांति समझौता हो भी जाए। तब भी रूस अपनी सेना मजबूत कर सकता है। इसे हल्का खतरा नहीं माना जा सकता। रूस पहले आक्रामक रवैया दिखा चुका है। इसलिए ढिलाई की गुंजाइश नहीं है। यूरोप को पहले से तैयारी रखनी होगी। जरूरत पड़ी तो मुकाबले के लिए भी तैयार रहना होगा।
क्या नाटो की एकता परीक्षा में?
ब्रिटेन ने नाटो के अनुच्छेद 5 की पुष्टि की। इसके तहत एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाता है। स्टारमर ने कहा कि ब्रिटेन की प्रतिबद्धता मजबूत है। उन्होंने संकेत दिया कि पहले यूरोपीय जिम्मेदारी पर सवाल उठे थे। लेकिन अब यूरोप को खुद मजबूत होना होगा। एकता ही सबसे बड़ी ताकत है।
क्या आर्कटिक में बढ़ेगी तैनाती?
स्टारमर ने बड़ा ऐलान किया। ब्रिटेन अपना कैरियर स्ट्राइक ग्रुप आर्कटिक और हाई नॉर्थ क्षेत्र में भेजेगा। यह कदम रूस की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए है। इस मिशन में अमेरिका और कनाडा भी शामिल होंगे। यह सिर्फ बयान नहीं है। यह कार्रवाई का संकेत है। समुद्री और बर्फीले इलाकों में भी ताकत दिखाई जाएगी।
क्या ब्रेक्सिट के बाद बदले रिश्ते?
स्टारमर ने यूरोपीय संघ के साथ रिश्तों की बात की। उन्होंने कहा कि 2020 के बाद बना ढांचा पर्याप्त नहीं है। ब्रेक्सिट के बाद दूरी बढ़ी है। अब आर्थिक तालमेल जरूरी है। उन्होंने माना कि इसके लिए समझौते करने होंगे। मजबूत अर्थव्यवस्था से ही रक्षा खर्च बढ़ाया जा सकता है। यह भाषण ऐसे समय आया जब घरेलू स्तर पर दबाव था। कुछ फैसलों पर आलोचना हुई। कुछ नेताओं ने सवाल उठाए। लेकिन स्टारमर ने कहा कि वह और मजबूत होकर निकले हैं। मंच पर उनका आत्मविश्वास साफ दिखा। उन्होंने कहा कि सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा।
क्या यूरोप नई दिशा में बढ़ेगा?
म्यूनिख से संदेश स्पष्ट है। यूरोप अब रक्षा पर अधिक खर्च करेगा। रूस को खुली चेतावनी दी गई है। नाटो की एकता दोहराई गई है। ब्रिटेन आगे की भूमिका चाहता है। अब देखना है कि बाकी देश कितनी तेजी दिखाते हैं। आने वाले महीनों में तस्वीर साफ होगी























