मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका ने क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है। कई लड़ाकू विमान तैनात किए गए हैं। दो विमानवाहक पोत भी भेजे गए हैं। हजारों सैनिकों की तैनाती की खबर है। हथियार और गोला बारूद पहुंचाया गया। इससे संभावित कार्रवाई की चर्चा तेज हो गई।
क्या अमेरिका दबाव बनाना चाहता
अमेरिकी प्रशासन ईरान पर परमाणु समझौते के लिए दबाव बना रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कूटनीतिक समाधान चाहते हैं। लेकिन सैन्य विकल्प भी खुला बताया गया है। व्हाइट हाउस ने बातचीत को प्राथमिकता बताया। साथ ही चेतावनी भी दी गई है। ईरान से समझौता करने की अपील की गई। इससे तनाव और बढ़ गया।
क्या रूस ने चेतावनी दी
रूस ने क्षेत्रीय हालात पर चिंता जताई है। क्रेमलिन ने संयम बरतने की अपील की। प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बयान जारी किया। उन्होंने तनाव को असामान्य स्तर बताया। रूस ने सभी पक्षों को सावधानी बरतने को कहा। कूटनीतिक रास्ता अपनाने पर जोर दिया। बयान ने अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचा।
क्या रूस ईरान के करीब
रूस और ईरान के संबंध मजबूत माने जाते हैं। हाल ही में दोनों ने संयुक्त नौसैनिक अभ्यास किया। रूस ने इसे पूर्व निर्धारित बताया। सहयोग बढ़ने के संकेत मिले हैं। यूक्रेन संकट में भी दोनों करीब रहे। रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा तेज हुई। इससे अमेरिका की चिंता बढ़ी।
क्या परमाणु मुद्दा केंद्र में
तनाव का मुख्य कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका इस पर नियंत्रण चाहता है। ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है। मिसाइल कार्यक्रम भी विवाद का मुद्दा है। इजराइल सुरक्षा को लेकर चिंतित है। बातचीत की कोशिशें जारी हैं। लेकिन समाधान अभी दूर नजर आता है।
क्या युद्ध का खतरा बढ़ा
सैन्य गतिविधियों से युद्ध की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञ हालात को संवेदनशील बता रहे हैं। किसी भी गलत कदम से संघर्ष बढ़ सकता है। क्षेत्रीय स्थिरता पर खतरा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। तेल बाजार भी प्रभावित हो सकता है। दुनिया की नजर मिडिल ईस्ट पर है।
क्या कूटनीति से समाधान संभव
रूस और कई देश बातचीत पर जोर दे रहे हैं। कूटनीतिक समाधान की उम्मीद जताई गई है। युद्ध टालने की कोशिशें जारी हैं। वैश्विक शक्तियां सक्रिय हो सकती हैं। ईरान और अमेरिका के बीच संवाद जरूरी माना गया। क्षेत्रीय शांति प्राथमिकता बताई गई। आने वाले दिन निर्णायक हो सकते हैं।

























