इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने प्रमुख अमेरिकी यहूदी संगठनों के सम्मेलन में यह घोषणा की। नेतन्याहू ने कहा कि अगले सप्ताह भारत के प्रधानमंत्री यहां आ रहे हैं। उन्होंने इसे अहम कूटनीतिक अवसर बताया। संसद में विशेष संबोधन की भी तैयारी की बात कही गई। इस दौरे को दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा के रूप में देखा जा रहा है।
क्या भारत-इजराइल संबंध और मजबूत होंगे?
नेतन्याहू ने कहा कि भारत और इजराइल के बीच गहरा रणनीतिक सहयोग है। उन्होंने भारत को 1.4 अरब आबादी वाला प्रभावशाली देश बताया। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से उभरती वैश्विक शक्ति है। इस यात्रा के दौरान रक्षा और तकनीकी सहयोग पर चर्चा होगी। दोनों देश साझेदारी को और विस्तार देने की योजना बना रहे हैं। यह दौरा रिश्तों को और मजबूत करेगा।
क्या यह तीसरे कार्यकाल का पहला दौरा है?
प्रधानमंत्री मोदी के तीसरे कार्यकाल में यह उनका पहला इजराइल दौरा होगा। इससे पहले वर्ष 2017 में उन्होंने ऐतिहासिक यात्रा की थी। वह यात्रा दोनों देशों के राजनयिक संबंधों की 25वीं वर्षगांठ पर हुई थी। उस समय रक्षा, साइबर सुरक्षा और कृषि सहयोग पर सहमति बनी थी। आतंकवाद से निपटने पर भी साझेदारी बढ़ी थी। अब एक बार फिर उच्चस्तरीय संवाद होने जा रहा है।
क्या पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा होगी?
सूत्रों के अनुसार इस बार की यात्रा में क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी चर्चा हो सकती है। पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियां महत्वपूर्ण हैं। क्षेत्रीय स्थिरता पर साझा रणनीति बन सकती है। वैश्विक राजनीतिक हालात भी एजेंडे में रह सकते हैं। दोनों देश सुरक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा सकते हैं। यह बैठक कई मायनों में अहम मानी जा रही है।
क्या आर्थिक सहयोग को नई गति मिलेगी?
हाल के महीनों में आर्थिक सहयोग बढ़ा है। सितंबर में द्विपक्षीय निवेश संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। इससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की यात्रा के दौरान मुक्त व्यापार समझौते पर भी प्रगति हुई थी। दोनों देशों ने रक्षा सह-विकास पर समझौता किया है। इससे तकनीकी साझा करने में तेजी आएगी।
क्या तकनीक और रक्षा होंगे केंद्र में?
इस यात्रा में रक्षा उत्पादन और नई तकनीक पर फोकस रहेगा। सह-उत्पादन के मॉडल पर चर्चा संभव है। औद्योगिक सहयोग को नई दिशा मिल सकती है। निवेश और नवाचार को बढ़ावा देने की कोशिश होगी। यह दौरा दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगा। दोनों देशों के रिश्तों में नया अध्याय जुड़ सकता है।
























