इंटरनेशनल न्यूज. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूक्रेन में चल रहे युद्ध के कूटनीतिक समाधान के लिए नई दिल्ली के रुख को दोहराते हुए कहा कि इस संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं हो सकता। इटली के फिउग्गी में जी7 आउटरीच सत्र के दौरान कोरिएरे डेला सेरा को दिए गए इंटरव्यू में जयशंकर ने सभी पक्षों से बातचीत की मेज पर लौटने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “लगभग तीन साल से यह युद्ध चल रहा है। युद्ध के मैदान से कोई हल निकलने की संभावना नहीं है। जितनी जल्दी बातचीत शुरू होगी, उतना ही बेहतर होगा।”
प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय भूमिका
जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस प्रयास में सक्रिय भागीदारी पर जोर देते हुए बताया कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के साथ कई बार चर्चा की है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल यूरोप तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। “दुनिया के बड़े हिस्से में यह भावना प्रबल है कि सभी पक्षों को बातचीत की ओर लौटना चाहिए।”
ICC पर भारत का रुख स्पष्ट
अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) द्वारा नेताओं पर लगाए गए अभियोगों के संदर्भ में जयशंकर ने भारत की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा, “हम ICC के सदस्य नहीं हैं, और इससे यह पता चलता है कि हमारा इस निकाय पर क्या दृष्टिकोण है।” हाल ही में ICC ने इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और पुतिन के खिलाफ वारंट जारी किए थे।
चीन के प्रभाव और रूस से संबंधों पर टिप्पणी
इंडो-पैसिफिक में चीन के बढ़ते प्रभाव पर उन्होंने कहा कि भारत अपने हितों के आधार पर साझेदार चुनता है। उन्होंने यूरोप के “चयनात्मक दृष्टिकोण” की आलोचना की, खासतौर पर रूस से ऊर्जा आयात पर। जयशंकर ने कहा, “यूरोप ने अपने व्यापार को पूरी तरह समाप्त नहीं किया। यह प्रक्रिया बहुत सावधानी से की गई। यह कहना कि यूरोप अपने लोगों की चिंता करेगा और बाकी दुनिया को ऐसा नहीं करना चाहिए, अनुचित है।”
तेल आयात और भारत की प्राथमिकताएं
भारत द्वारा रूस से तेल आयात पर सवालों का जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा, “हम अपने आर्थिक हितों को प्राथमिकता देते हैं। जीवन दूसरों के हितों का सम्मान करने के बारे में है, न कि हर चीज़ को अपने हिसाब से करने के बारे में।”
यूरोपीय संघ और भारत-इटली संबंध
भारत-इटली संबंधों को “सकारात्मक” बताते हुए जयशंकर ने हाल ही में घोषित संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना की सराहना की। उन्होंने यूरोपीय संघ के साथ व्यापार वार्ताओं को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया और जलवायु लक्ष्यों पर यूरोप की प्रतिबद्धताओं पर सवाल उठाए।
दोहरी चुनौतियों पर जयशंकर का रुख
जयशंकर ने यूक्रेन और मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा, “इन संकटों को सुलझाने के लिए अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व की आवश्यकता है। हमें प्रयास करना होगा, चाहे यह कितना भी कठिन क्यों न हो। बातचीत और साझा समाधान ही रास्ता है।”

























