अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि भारत ने रूसी तेल खरीद रोकने पर सहमति जताई है। यह दावा अमेरिका-भारत व्यापार समझौते से जोड़ा गया। टैरिफ घटाने की बात कही गई। बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति गरम हुई। कई सवाल उठे। लेकिन भारत की ओर से कोई पुष्टि नहीं आई। दिल्ली की चुप्पी चर्चा का केंद्र बन गई।
क्रेमलिन ने इस दावे पर क्या कहा?
रूस की सरकार Kremlin ने ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया दी। साफ कहा गया कि दिल्ली से कोई संदेश नहीं मिला। रूस ने बताया कि अब तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई है। बयान संयमित था। अटकलों से दूरी रखी गई। तथ्यों की बात की गई। संकेत दिया गया कि दावा अभी अपुष्ट है।
दिल्ली की चुप्पी क्यों बढ़ा रही है सस्पेंस?
भारत की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई। यही सबसे बड़ा सवाल बन गया। क्या कोई फैसला हुआ है। या सिर्फ दावा किया गया है। कूटनीति में चुप्पी भी मायने रखती है। लेकिन यहां अस्पष्टता है। नीति में बदलाव का कोई संकेत नहीं दिखा। इस चुप्पी ने बहस तेज कर दी। नजरें आधिकारिक बयान पर टिकी हैं।
रूस-भारत रिश्तों पर क्या बोला मॉस्को?
क्रेमलिन के प्रवक्ता Dmitry Peskov ने कहा कि भारत के साथ रिश्ते बेहद अहम हैं। उन्होंने अमेरिका-भारत संबंधों के सम्मान की बात कही। साथ ही रूस-भारत रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिक बताया। मॉस्को ने संबंध और मजबूत करने की इच्छा जताई। यह संदेश भरोसे का था। पुराने रिश्तों पर जोर दिया गया।
ट्रंप ने व्यापार समझौते में क्या दावा किया?
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौता हुआ है। इसके तहत टैरिफ 50 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत किए गए। उन्होंने इसे बड़ी उपलब्धि बताया। दावा किया गया कि भारत अमेरिका से अधिक तेल खरीदेगा। वेनेजुएला का भी जिक्र हुआ। बयान को यूक्रेन युद्ध से जोड़ा गया। लेकिन पुष्टि अभी बाकी है।
2022 के बाद रूसी तेल में भारत की भूमिका क्या रही?
यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रियायती रूसी तेल खरीदा। 2022 में भारत सबसे बड़ा खरीदार बना। पश्चिमी देशों में नाराजगी दिखी। रूस पर ऊर्जा प्रतिबंध लगे। इसके बावजूद भारत ने खरीद जारी रखी। ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। सस्ता तेल अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी माना गया। नीति अब तक बदली नहीं।
क्या ट्रंप का बयान राजनीतिक दबाव की रणनीति है?
सबसे बड़ा सवाल यही है। क्या यह वास्तविक समझौता है। या राजनीतिक दबाव का हिस्सा। क्रेमलिन की स्थिति साफ है। दिल्ली से कोई संदेश नहीं। भारत की चुप्पी फैसले का संकेत नहीं देती। आने वाले दिनों में स्पष्टता आ सकती है। फिलहाल मामला सस्पेंस में है। दुनिया की नजर अगली प्रतिक्रिया पर टिकी है।

























