सऊदी अरब ने मंगलवार को यमन के पोर्ट शहर मुकल्ला पर बमबारी की। निशाना यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) से आ रहे हथियारों का शिपमेंट था। सऊदी का दावा है कि ये हथियार अलगाववादी ताकतों के लिए थे। इसके साथ ही सऊदी अरब ने UAE को चेतावनी भी दी है। यह हमला एक ऐसे देश में हुआ जो इंटरनेशनल ट्रेड रूट के किनारे बसा है और अब फारस की खाड़ी इलाके में नए खतरे पैदा कर सकता है।
इस घटना के बाद यमन में सिविल वॉर फिर से भड़क सकता है। वहां पहले से ही रीजनल ताकतों की एक मुश्किल लड़ाई चल रही है। अलगाववादी ‘सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल’ (STC) ने इसी महीने हद्रामौत और माहरा प्रांतों पर कब्ज़ा कर लिया था, जिसमें तेल की फैसिलिटी भी शामिल हैं।
सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक, हमले के बाद एक मिलिट्री स्टेटमेंट जारी किया गया है। स्टेटमेंट में कहा गया है कि जहाज UAE के पूर्वी तट पर एक पोर्ट शहर फुजैराह से निकलकर वहां पहुंचा था। बयान में कहा गया, “जहाज़ों के क्रू ने ट्रैकिंग डिवाइस बंद कर दिए थे और STC सेनाओं के लिए बड़ी मात्रा में हथियार और लड़ाकू गाड़ियां उतार दी थीं।”
यमन का लंबा सिविल वॉर
यमन एक दशक से ज़्यादा समय से सिविल वॉर में फंसा हुआ है। इसमें सांप्रदायिक और क्षेत्रीय ताकतों का दखल रहा है। ईरान के सपोर्ट वाले हूथी विद्रोही देश के सबसे घनी आबादी वाले इलाकों पर कंट्रोल करते हैं, जिसमें राजधानी सना भी शामिल है।
दूसरी ओर, सऊदी अरब और UAE समेत एक क्षेत्रीय गठबंधन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त दक्षिणी सरकार का सपोर्ट करता है। इस युद्ध से मानवीय संकट पैदा हुआ है और अर्थव्यवस्था तबाह हो गई है, लेकिन 2022 से हिंसा कम हो गई है क्योंकि दोनों पक्षों के बीच गतिरोध आ गया है।
STC की बढ़ती ताकत
UAE के सपोर्ट वाले अलगाववादियों के इस नए कदम ने हूथी विरोधी सहयोगियों के बीच राजनीतिक व्यवस्था को उलट दिया है। यह युद्ध 2014 में शुरू हुआ था, जब हूथी अपने उत्तरी गढ़ सादा से निकले और सना पर कब्ज़ा कर लिया। अब नई लड़ाई STC और इंटरनेशनल सरकारी सेनाओं और उनके साथी कबीलों के बीच है, जो दोनों ही हूथी विद्रोहियों के खिलाफ एक ही कैंप का हिस्सा हैं।























