इंटरनेशनल न्यूज. बांग्लादेश की सियासत इन दिनों उथल-पुथल में है। नई किताब ‘इंशाअल्लाह बांग्लादेश: द स्टोरी ऑफ एन अनफिनिश्ड रेवोल्यूशन’ ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। इसमें दावा किया गया है कि अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA ने मौजूदा सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान के ज़रिए शेख हसीना की सरकार को गिरवाया। किताब के अनुसार, यह सब दक्षिण एशिया के मजबूत नेताओं को कमजोर करने की एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय चाल थी।
किताब में क्या है बड़ा खुलासा?
इस किताब को दीप हालदार, जयदीप मजूमदार और साहिदुल हसन खोकोन ने लिखा है। इसमें बांग्लादेश के पूर्व गृह मंत्री असदुज़्जमान खान कमाल के हवाले से कई चौंकाने वाले बयान दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पता ही नहीं चला कि CIA ने जनरल वाकर को अपने जाल में फंसा लिया है। यहां तक कि खुफिया एजेंसियां भी हसीना को चेतावनी देने में नाकाम रहीं कि उनके ही रिश्तेदार उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं।
अभिमन्यु की तरह घिरीं हसीना
किताब के मुताबिक, जनरल वाकर ने हसीना को गिराने के लिए जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी संगठनों से हाथ मिला लिया। असदुज़्जमान ने कहा कि जैसे महाभारत में अभिमन्यु अपने ही लोगों से घिर गया था, वैसे ही हसीना को भी उनके अपने लोगों ने घेर लिया। इस पूरी साजिश पर बातचीत दिल्ली के एक होटल में हुई थी, जिसमें आवामी लीग के दो पूर्व सांसद भी मौजूद थे।
जिसे बनाया सेना प्रमुख, उसी ने किया वार!
लेखकों के अनुसार, वाकर-उज-जमान को खुद हसीना ने जून 2024 में सेना प्रमुख बनाया था। लेकिन केवल दो महीने बाद 5 अगस्त को उन्होंने तख्तापलट कर हसीना को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया। पूर्व गृह मंत्री ने दावा किया कि यह वाकर का पहला गुप्त मिशन था — उसी नेता को गिराना जिसने उसे ऊंचा पद दिया था। इस घटना के बाद बांग्लादेश की राजनीति में सेना की भूमिका पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया।
क्या था सेंट मार्टिन द्वीप का खेल?
किताब में कहा गया है कि अमेरिका का असली मकसद सेंट मार्टिन द्वीप पर कब्जा करना था, जो रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। हसीना ने अपने करीबी नेताओं से कहा था कि अगर वह यह द्वीप अमेरिका को सौंप देतीं, तो उनकी सरकार बच सकती थी। लेकिन उन्होंने कहा – “देश की संप्रभुता बिकाऊ नहीं है।” यही जिद उनके पतन का कारण बनी।
ISI और जमात का गुप्त गठजोड़
किताब में पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी ISI और जमात-ए-इस्लामी की मिलीभगत का भी खुलासा किया गया है। कहा गया कि ISI प्रशिक्षित लोग छात्र प्रदर्शनों में शामिल हुए और उन्होंने पुलिस पर हमले किए। असदुज़्जमान ने बताया कि जब हालात बिगड़ने लगे तो उन्होंने हसीना को चेताया, लेकिन जनरल वाकर ने कहा कि “फिक्र न करें, सेना स्थिति संभाल लेगी।” अगले ही दिन हसीना को देश छोड़ना पड़ा।
गद्दारी या साजिश? जवाब वक्त देगा!
‘इंशाअल्लाह बांग्लादेश’ सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति की गहराई में झांकने वाला दस्तावेज है। यह दिखाता है कि कैसे सत्ता के भीतर ही गद्दारी छिपी होती है। दशकों तक देश को स्थिरता देने वाली शेख हसीना आज उसी सिस्टम की साजिश की शिकार बताई जा रही हैं। अब सवाल है — क्या यह CIA की चाल थी या परिवार के भीतर की गद्दारी?

























