एक नई रिपोर्ट ने ब्रिटेन में व्यापक चिंता पैदा कर दी है। इसमें चेतावनी दी गई है कि गुप्त कानूनी शक्तियों के तहत सरकार चुपचाप नागरिकता रद्द कर सकती है। ये शक्तियां गृह सचिव के पास हैं। नागरिक बिना किसी पूर्व सूचना के अपनी राष्ट्रीयता खो सकते हैं। यहां तक कि आजीवन निवासी भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं हैं। कानून किसी व्यक्ति के किसी अन्य राष्ट्रीयता के लिए “पात्र” होने पर कार्रवाई की अनुमति देता है। उस देश से वास्तविक संबंध मायने नहीं रखते।
इन चिंताजनक मुद्दों को किसने उठाया है?
मानवाधिकार समूह रिप्रीव और रननीमेड ट्रस्ट ने यह रिपोर्ट जारी की है। उन्होंने ब्रिटेन के नागरिकता कानूनों का विस्तार से अध्ययन किया है। उनके निष्कर्षों से पता चलता है कि बड़े पैमाने पर दुरुपयोग संभव है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि अल्पसंख्यकों को सबसे अधिक खतरा है। उनका कहना है कि शक्तियां अत्यधिक और गुप्त हैं। इस रिपोर्ट का हवाला मिडिल ईस्ट आई ने दिया है। इसने राष्ट्रीय बहस को और तेज कर दिया है।
कितने लोग प्रभावित हो सकते हैं?
रिपोर्ट के अनुसार, लगभग नौ मिलियन लोग असुरक्षित स्थिति में हैं। यह ब्रिटेन की कुल जनसंख्या का लगभग 13 प्रतिशत है। इन नागरिकों के माता-पिता विदेशी मूल के हैं। इनमें से कई मुस्लिम समुदायों से संबंध रखते हैं। उनकी नागरिकता सरकार के विवेक पर निर्भर करती है। एक प्रशासनिक निर्णय भी उनके जीवन को बदल सकता है। इस व्यापक स्थिति ने नागरिक अधिकार समूहों को स्तब्ध कर दिया है।
मुसलमान विशेष रूप से चिंतित क्यों हैं?
रिपोर्ट में कहा गया है कि मुसलमान सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं। दक्षिण एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व से संबंध रखने वाले समुदायों को अधिक जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तानी, बांग्लादेशी, सोमाली, नाइजीरियाई और भारतीय मूल के नागरिकों का उल्लेख किया गया है। आलोचकों का कहना है कि यह कानून नस्लीय भेदभाव को बढ़ावा देता है। मुस्लिम नागरिकता सशर्त हो जाती है। श्वेत ब्रिटिश नागरिकों को ऐसी किसी अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ता। यह असमान व्यवहार भय को बढ़ावा देता है।
कानून वास्तव में क्या अनुमति देता है?
मौजूदा नियमों के तहत, किसी अन्य राष्ट्रीयता की संभावना होने पर नागरिकता रद्द की जा सकती है। भले ही वह व्यक्ति कभी उस देश में रहा न हो। यहां तक कि वह उस देश से जुड़ाव भी न रखता हो। फिर भी, नागरिकता वापस ली जा सकती है। आलोचकों का कहना है कि यह बुनियादी निष्पक्षता का उल्लंघन है। पहले ऐसी शक्तियों का प्रयोग केवल युद्ध की स्थितियों में किया जाता था। अब इनका प्रयोग नियमित रूप से किया जाता है।
क्या इन फैसलों में राजनीति का हाथ है?
रिप्रीव की माया फोआ ने राजनीतिक दुरुपयोग की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने राजनीतिक लाभ के लिए नागरिकता छीन ली थी। पीड़ितों में मानव तस्करी से बचे लोग भी शामिल थे। मौजूदा सरकार ने इन शक्तियों को और भी बढ़ा दिया है। रननीमेड ट्रस्ट की सीईओ शबना ने इस प्रवृत्ति को भयावह बताया। उन्होंने कहा कि नागरिकता मंत्रियों के विवेक पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जवाबदेही का अभाव है।
भारतीय मुसलमान भी खतरे में क्यों हैं?
रिपोर्ट में भारतीय मूल के नागरिकों पर विशेष ध्यान दिया गया है। ब्रिटेन में भारत से लगभग 984,000 लोग रहते हैं। इन नियमों से कई लोग प्रभावित हो सकते हैं। पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिकों को भी इसी तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि यह एक खतरनाक बदलाव का संकेत है। नागरिकता अब सुरक्षित नहीं रही। कई परिवारों के लिए, पहचान ही अब अनिश्चित सी लगने लगी है।

























