अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान के साथ टकराव नहीं चाहते।उनका कहना है कि बातचीत हमेशा पहला विकल्प होना चाहिए।ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में यह बात साफ की।उन्होंने कहा कि जंग किसी के हित में नहीं होती।लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका पूरी तरह तैयार है।उनके बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी।दुनिया की नजर इस बयान पर टिक गई है।
अमेरिकी युद्धपोत क्यों भेजे गए?
ट्रंप ने बताया कि अमेरिका के बेहद शक्तिशाली युद्धपोत ईरान की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।उन्होंने कहा कि अगर इन जहाजों का इस्तेमाल न करना पड़े तो यही सबसे अच्छा होगा।इस बयान से अमेरिका की रणनीति साफ झलकती है।दबाव बनाए रखना भी नीति का हिस्सा है।अमेरिका किसी भी हालात से निपटने को तैयार रहना चाहता है।यह संदेश सीधे तौर पर दिया गया है।मिडिल ईस्ट में सतर्कता बढ़ गई है।
मिडिल ईस्ट में अमेरिकी नौसेना कितनी मजबूत है?
अमेरिकी नौसेना ने मिडिल ईस्ट में अपनी मौजूदगी और बढ़ा दी है।पिछले 48 घंटों में एक नया विध्वंसक युद्धपोत तैनात किया गया है।इस जहाज का नाम यूएसएस डेलबर्ट डी ब्लैक है।अब इस क्षेत्र में कुल छह अमेरिकी विध्वंसक मौजूद हैं।इसके अलावा एक विमानवाहक पोत भी पहले से तैनात है।तीन अन्य तटीय युद्धपोत भी क्षेत्र में हैं।तस्वीर साफ संकेत दे रही है।
ईरान ने किस तरह की तैयारी की है?
दूसरी ओर ईरान ने भी अपनी सैन्य तैयारी तेज कर दी है।ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को एक हजार नए ड्रोन सौंपे गए हैं।यह कदम संभावित टकराव को देखते हुए उठाया गया है।तेहरान के सूत्रों का कहना है कि ईरान दबाव में नहीं झुकेगा।वह मानता है कि शर्तों पर समझौता नुकसानदेह हो सकता है।इस तैयारी को रक्षा मंत्रालय का समर्थन मिला है।संदेश साफ है।
ये ड्रोन कितने आधुनिक हैं?
ईरानी सेना को मिले ड्रोन आधुनिक तकनीक से लैस हैं।इनमें हमला करने वाले ड्रोन शामिल हैं।निगरानी के लिए इस्तेमाल होने वाले ड्रोन भी हैं।इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के लिए खास ड्रोन भी दिए गए हैं।ये जमीन समुद्र और हवा में मौजूद लक्ष्यों पर कार्रवाई कर सकते हैं।चलते हुए लक्ष्यों को भी निशाना बना सकते हैं।ईरान इन्हें अपनी बड़ी ताकत मान रहा है।
पिछले अनुभवों से क्या सीखा गया?
इन ड्रोन को अमेरिका और इजरायल की पिछली सैन्य कार्रवाइयों के अनुभव के आधार पर तैयार किया गया है।ईरानी विशेषज्ञों ने पुरानी कमियों को ध्यान में रखा है।रक्षा मंत्रालय की निगरानी में इनका डिजाइन तैयार हुआ।मकसद भविष्य के खतरों से निपटना है।ईरान अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।इसे रोकथाम की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।मिडिल ईस्ट का संतुलन बदलता दिख रहा है।
आगे क्या होगा जंग या बातचीत?
अमेरिका बातचीत की बात कर रहा है लेकिन सैन्य ताकत भी दिखा रहा है।ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं दिखता।दोनों पक्ष अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर रहे हैं।अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित है।मिडिल ईस्ट एक बार फिर तनाव के दौर में है।अगला कदम क्या होगा यह साफ नहीं है।दुनिया की नजर इस टकराव पर टिकी हुई है।























