जियोपॉलिटिकल जानकार वेलिना चकारोवा का कहना साफ है। अमेरिका, चीन और रूस जंग नहीं चाहते। ये देश ताकतवर हैं। लेकिन नासमझ नहीं। इन्हें पता है कि जंग से अर्थव्यवस्था टूटेगी। सप्लाई चेन बिखरेगी। परमाणु खतरा बढ़ेगा। यही वजह है कि टकराव के बावजूद सीधी लड़ाई से बचा जा रहा है।
यूक्रेन युद्ध क्या वैश्विक जंग में बदलेगा?
यूक्रेन युद्ध चौथे साल में जा रहा है। कई बार कहा गया कि NATO और रूस टकरा सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एक्सपर्ट मानते हैं कि आगे भी ऐसा नहीं होगा। न परमाणु हमला होगा। न यूरोप में सीधा युद्ध। कोशिश होगी कि संघर्ष सीमित रहे। बातचीत के रास्ते खुले रहें। युद्ध थके हुए पक्षों के लिए बोझ बन चुका है।
क्या चीन 2026 में ताइवान पर हमला करेगा?
ताइवान सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। लेकिन 2026 में हमला होगा। ऐसा एक्सपर्ट नहीं मानते। चीन दबाव बनाएगा। सैन्य अभ्यास करेगा। बयान देगा। लेकिन सीधी जंग नहीं करेगा। क्योंकि ताइवान पर हमला पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था हिला देगा। चिप्स की सप्लाई टूटेगी। व्यापार रुकेगा। नुकसान चीन को भी होगा।
अगर विश्वयुद्ध नहीं तो खतरा कहां बढ़ेगा?
सीधा युद्ध नहीं होगा। लेकिन खतरा खत्म नहीं होता। अफ्रीका के साहेल इलाके में हिंसा बढ़ सकती है। मिडिल ईस्ट में तनाव बना रहेगा। आर्कटिक में मुकाबला तेज होगा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी बढ़ेगी। बड़ी ताकतें सीधे नहीं लड़ेंगी। छोटे देशों के ज़रिये दबाव बनाएंगी। इसे प्रॉक्सी वॉर कहा जाता है।
क्या भविष्य की लड़ाई हथियारों से नहीं तकनीक से होगी?
अब जंग सिर्फ मैदान में नहीं होगी। साइबर हमले बढ़ रहे हैं। स्पेस में होड़ चल रही है। AI नया हथियार बन चुका है। सेमीकंडक्टर और ऊर्जा सप्लाई रणनीतिक ताकत बन गए हैं। देश सिस्टम को निशाना बना रहे हैं। नेटवर्क को कमजोर किया जा रहा है। यही आने वाले दौर की असली लड़ाई होगी।
2026 में दुनिया को क्या समझना चाहिए?
संदेश साफ है। डर बहुत है। लेकिन नियंत्रण भी है। 2026 में तीसरा विश्वयुद्ध नहीं होगा। हां। तनाव रहेगा। बयानबाज़ी होगी। सैन्य खर्च बढ़ेगा। गठबंधन बदलेंगे। लेकिन लाल रेखा पार नहीं होगी। युद्ध का शोर चलता रहेगा। फैसले शांत दिमाग से लिए जाएंगे। दुनिया अभी जंग से एक कदम पीछे है।
























