International News: यमन की सेना ने आधिकारिक बयान में इस हमले की पुष्टि की है। प्रवक्ता ने कहा कि चाहे हमें इसकी कितनी भी भारी कीमत चुकानी पड़े, हम ग़ज़ा का साथ नहीं छोड़ेंगे। बयान में इस हमले को “नैतिक और सामरिक ज़िम्मेदारी” बताया गया। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि यह शुरुआत है, और आने वाले दिनों में यमन की प्रतिक्रिया और तेज़ होगी। इस बयान के बाद पूरे वेस्ट एशिया में सैन्य हलचल तेज़ हो गई है। इज़राइल की डिफेंस फोर्स भी हाई अलर्ट पर है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मिसाइल लाल सागर की दिशा से दागी गई।
ग़ज़ा बना यमन की प्राथमिकता
यमन ने स्पष्ट कर दिया है कि ग़ज़ा पर हमला उसे स्वीकार्य नहीं। ईरान पर इज़राइल के हमले के बाद अमेरिका के समर्थन को यमन ने सीधी धमकी दी थी। अब यमन ने उस धमकी को अंजाम में बदला है। यमन का यह स्टैंड अरब दुनिया के भीतर भी एक संकेत है। ग़ज़ा को लेकर यमन की नीति फिलहाल सख्त और अटल दिख रही है। उनका फोकस मानवाधिकारों से अधिक “इस्लामी एकता” पर है। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि यमन की हूती गुट इस पूरे ऑपरेशन में मुख्य भूमिका निभा रहा है।
ईरान-अमेरिका तनाव की छाया
इस हमले के पीछे ईरान और अमेरिका के बीच का तनाव भी अहम वजह है। यमन, ईरान के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। ईरान पर हुए हमले के बाद यमन ने अमेरिका को चेतावनी दी थी कि वह ग़ज़ा और तेहरान दोनों के साथ है। अब यमन ने वह चेतावनी ज़मीन पर मिसाइल से साबित कर दी है। इस हमले ने अमेरिका के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। वॉशिंगटन को अब मध्य-पूर्व में कई मोर्चों पर संभलकर चलना होगा। यह हमला अमेरिका के डिप्लोमैटिक रूटमैप को झटका दे सकता है।
इज़राइल की सुरक्षा में सेंध
इज़राइल का आयरन डोम भले ही मिसाइल इंटरसेप्ट कर गया हो, लेकिन यह अटैक साइकोलॉजिकल वारफेयर का हिस्सा है। यमन जैसे ‘डिस्टेंस’ देश से मिसाइल का उड़कर आना, इज़राइल की सुरक्षा नीति पर सवाल खड़े करता है। यह हमला “बहु-आयामी खतरे” का उदाहरण बन गया है। इज़राइल अब एक और फ्रंट को मैनेज करने में लग गया है। उधर, यमन को लग रहा है कि ग़ज़ा की लड़ाई में उसकी ये एंट्री एक नैतिक समर्थन भी है। मिसाइल तो सिर्फ शुरुआत मानी जा रही है, आगे ड्रोन और अन्य तरीकों से हमले की आशंका जताई जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और दबाव
संयुक्त राष्ट्र ने इस हमले को लेकर चिंता जताई है। अमेरिका ने यमन को चेताया है कि वह ‘सीमा लांघ’ रहा है। उधर, ईरान ने चुप्पी साध ली है लेकिन ग़ज़ा समर्थक ब्लॉक्स इस हमले को “क्रांतिकारी प्रतिक्रिया” कह रहे हैं। यूरोपियन यूनियन इस मामले में दो फाड़ में बंटी हुई दिख रही है। कतर और लेबनान ने अप्रत्यक्ष समर्थन दिया है। इस हमले ने पूरी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को गरमा दिया है। भारत ने फिलहाल इस मसले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
मध्य-पूर्व में नया समीकरण
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यमन अपने हमलों को लगातार बनाए रखेगा? क्या ग़ज़ा की लड़ाई अब सीमा पार पहुँच चुकी है? यमन के इस कदम से ये तय हो गया है कि अब संघर्ष केवल हमास और इज़राइल के बीच नहीं रहा। यह पूरा इलाका बारूद के ढेर पर बैठा है। अमेरिका को अब इज़राइल के साथ-साथ यमन और ईरान के फ्रंट पर भी चौकसी रखनी होगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि ये हमला सिर्फ मिसाइल नहीं, एक चेतावनी है – युद्ध के संभावित विस्तार की।

























