पॉल्यूशन का असर सबसे ज्यादा लंग्स पर पड़ता है। धूल, धुआं और केमिकल कण सांस के साथ अंदर जाते हैं जिससे खांसी शुरू हो जाती है। जरूरी है कि जरूरत पड़ने पर ही बाहर निकलें। मास्क का इस्तेमाल करें और घर में एयर प्यूरीफायर या पौधे रखें। मुलेठी एक पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधि मानी जाती है जो गले की सूजन और जलन कम करती है। आप इसे चूस सकते हैं या उबालकर चाय की तरह पी सकते हैं। नियमित सेवन से इम्यूनिटी भी मजबूत होती है और खांसी में जल्दी राहत मिलती है।
लौंग होगा काफी कारगर
लौंग में मौजूद यूजेनॉल तत्व एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों वाला होता है। इसे हल्का भूनकर या सीधे चबाकर लिया जा सकता है। लौंग वाली चाय भी खांसी और खराश में तेजी से असर दिखाती है, खासकर ठंडी हवा के समय। अदरक, तुलसी, दालचीनी, मुलेठी और काली मिर्च को उबालकर बनी हर्बल चाय गले के लिए बहुत फायदेमंद होती है। यह गले की सूजन कम करती है और अंदर तक गर्माहट पहुंचाती है। इसे दिन में एक या दो बार लिया जा सकता है।
रात में भाप लेना न भूलें
सोने से पहले 5 से 10 मिनट भाप लेने से गले और नाक में जमा धूल और म्यूकस निकल जाता है। इससे खांसी और खराश में काफी राहत मिलती है। पानी में नमक या एक चुटकी अजवाइन डालना और भी बेहतर माना जाता है।
हल्दी वाला दूध असरदार
हल्दी में मौजूद करक्यूमिन तत्व एंटी-इंफ्लेमेटरी होता है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। रात में सोने से पहले हल्दी वाला दूध लेने से खांसी-खराश में आराम मिलता है और वायरल इंफेक्शन से भी बचाव होता है।
धूल भरे इलाकों से दूरी रखें
पॉल्यूशन पीक टाइम यानी सुबह और शाम में घर से न निकलें। धूल भरे या ट्रैफिक वाले क्षेत्रों से बचें। सही खानपान, पानी का पर्याप्त सेवन और देसी नुस्खों का प्रयोग करने से फेफड़े सुरक्षित रह सकते हैं और गले की समस्या कम होगी।

























