भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है, क्योंकि दशकों तक इस संधि का फायदा लेने वाला पाकिस्तान अब भारत के नए कदमों से दबाव में आ गया है।
सिंधु नदी प्रणाली की महत्ता
सिंधु नदी प्रणाली में छह बड़ी नदियाँ शामिल हैं—सिंधु, चिनाब, झेलम, रावी, ब्यास और सतलुज जो दोनों देशों में से होकर बहती हैं। यह सिस्टम पीने के पानी, कृषि और बिजली उत्पादन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है, जिससे करोड़ों लोगों की ज़िंदगी जुड़ी हुई है।
1960 की संधि से हुआ बंटवारा
19 सितंबर 1960 को वर्ल्ड बैंक की मदद से दोनों देशों के बीच सिंधु जल संधि हुई। इसमें भारत को तीन पूर्वी नदियाँ—सतलुज, ब्यास और रावी का हक मिला, जबकि पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियाँ—सिंधु, चिनाब और झेलम का बड़ा हिस्सा दिया गया, जिससे पाकिस्तान को काफी राहत मिली।
दशकों तक चलती रही संधि
यह संधि लगभग सत्तर सालों तक चलती रही और दोनों देश इसके तहत अपने-अपने हकों के अनुसार पानी का इस्तेमाल करते रहे। लेकिन समय के साथ यह संधि विवादों का कारण भी बनती गई, खासकर जब भारत ने अपने हिस्से के प्रोजेक्ट्स पर काम तेज़ किया।
पहलगाम हमले के बाद बड़ा फैसला
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया और इसके बाद कश्मीर में हाइड्रो प्रोजेक्ट्स की गति तेज़ कर दी, जिससे पाकिस्तान की चिंता और बढ़ गई।
भारत के प्रोजेक्ट्स से बढ़ा दबाव
भारत ने पाकल दूल, किरू, परणई और क्वार जैसे हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स पर काम तेज़ किया है, जिससे पानी के बहाव को कंट्रोल करने की क्षमता बढ़ेगी और यही बात पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है।
पाकिस्तान ने लगाए गंभीर इलज़ाम
पाकिस्तान की सरकार ने भारत पर पानी को हथियार बनाने का इलज़ाम लगाया है और इसे एक खतरनाक कदम बताया है। उसने यह भी कहा है कि अगर पानी रोका गया तो यह उसके लिए “रेड लाइन” होगी।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया मामला
पाकिस्तान ने इस मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी उठाया है और कहा है कि गर्मी के मौसम में पानी की कमी उसके देश के लिए बड़ा संकट बन सकती है, जिससे कृषि और जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
जल संकट का डर क्यों बढ़ा
पाकिस्तान की बड़ी आबादी सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है और अगर पानी की सप्लाई घटती है तो उसके सामने बड़ा जल संकट खड़ा हो सकता है, जिस कारण वह लगातार इस मामले पर चिंता जाहिर कर रहा है।
भारत अपने रुख पर कायम
भारत ने स्पष्ट किया है कि अगर पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना जारी रखता है तो संधि को फिर से लागू करने का कोई सवाल नहीं उठता। यह रुख दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा रहा है।
भविष्य में बढ़ सकता है टकराव
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मामला इसी तरह तीखा बना रहता है तो आने वाले समय में भारत और पाकिस्तान के बीच पानी को लेकर बड़ा टकराव भी हो सकता है, क्योंकि यह सिर्फ पानी का नहीं, बल्कि रणनीतिक और राजनीतिक मुद्दा भी बन चुका है

























