मुंबई में दिवंगत अभिनेता Dharmendra की प्रार्थना सभा में भारी भीड़ उमड़ी थी। थिएटर मालिक Manoj Desai ने बताया कि वहां गाड़ियों की लंबी कतारें लगी थीं। हर तरफ लोगों का सैलाब था। आम लोगों से लेकर फिल्म इंडस्ट्री की बड़ी हस्तियां तक मौजूद थीं। माहौल बेहद भावुक था। भजन चल रहे थे। हर कोई नम आंखों से धर्मेंद्र को याद कर रहा था।
सनी देओल के घर का हाल क्या था?
मनोज देसाई के मुताबिक, प्रार्थना सभा के दौरान Sunny Deol से मिलने के लिए उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा। उन्होंने बताया कि उनकी गाड़ी 86वें नंबर पर खड़ी थी। चारों तरफ बड़ी-बड़ी गाड़ियां थीं। सनी देओल बेहद शांत और संयमित नजर आए। देसाई ने सनी से कहा कि भीड़ ज्यादा है, इसलिए वे दूसरे गेट से निकल जाएंगे। सनी ने आने के लिए धन्यवाद कहा। बाहर निकलने के बाद भी उन्हें करीब 45 मिनट तक अपनी गाड़ी का इंतजार करना पड़ा।
क्या इतनी भीड़ पहले कभी देखी गई?
मनोज देसाई ने साफ कहा कि धर्मेंद्र की प्रार्थना सभा जैसी भीड़ उन्होंने कभी नहीं देखी। उन्होंने बताया कि वे Rajesh Khanna और Yash Chopra जैसे दिग्गजों की प्रार्थना सभाओं में भी शामिल हो चुके हैं। यहां तक कि वे एक बार Amitabh Bachchan के पास बैठ चुके हैं। लेकिन धर्मेंद्र की सभा कुछ अलग ही थी। ऐसा लग रहा था जैसे पूरा देश वहां मौजूद हो। हर कोई आना चाहता था।
हेमा मालिनी क्यों नहीं आईं?
सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहा कि Hema Malini इस प्रार्थना सभा में क्यों नहीं आईं। मनोज देसाई ने कहा कि उन्हें इसमें कोई हैरानी नहीं हुई। उन्होंने बताया कि किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र के लिए अलग प्रार्थना सभा रखी थी। यह फैसला पहले से सोच-समझकर लिया गया था। उनका मानना है कि यह बेहतर ही रहा।
मनोज देसाई ने क्या वजह बताई?
मनोज देसाई ने कहा कि अगर हेमा मालिनी उस सभा में आ जातीं और किसी ने कुछ गलत कह दिया होता, तो माहौल बिगड़ सकता था। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र और हेमा मालिनी के रिश्ते बेहद करीबी थे। लेकिन ऐसे मौके पर भावनाएं बहुत संवेदनशील होती हैं। किसी एक शब्द से पूरा माहौल खराब हो सकता था। इसलिए अच्छा हुआ कि हेमा मालिनी वहां नहीं आईं। इससे सभा की शांति बनी रही।
परिवार ने अलग-अलग प्रार्थना सभा क्यों रखी?
देसाई के अनुसार, धर्मेंद्र की पत्नी प्रकाश कौर और बेटों Bobby Deol और सनी देओल ने अलग प्रार्थना सभा रखी। वहीं हेमा मालिनी ने अपनी तरफ से अलग आयोजन किया। यह फैसला परिवार की सहमति से लिया गया था। मकसद सिर्फ इतना था कि किसी तरह की असहज स्थिति न बने। हर कोई सम्मान के साथ धर्मेंद्र को विदाई देना चाहता था।
फिल्म इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ा?
धर्मेंद्र के जाने से हिंदी सिनेमा में एक खालीपन आ गया है। मनोज देसाई ने कहा कि वह सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि एक दौर थे। उनकी प्रार्थना सभा में उमड़ी भीड़ इस बात का सबूत है कि लोग उन्हें कितना प्यार करते थे। इंडस्ट्री और दर्शक दोनों उन्हें लंबे समय तक याद करेंगे। धर्मेंद्र का नाम भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा जिंदा रहेगा।

























