दिवंगत अभिनेता Vinod Khanna की निजी ज़िंदगी हमेशा सुर्खियों में रही। दो शादियां, आध्यात्मिक राह, परिवार से दूरी और फिर वापसी—इन सभी पहलुओं को लेकर कई तरह की कहानियां बनीं। अब उनकी दूसरी पत्नी कविता खन्ना ने एक इंटरव्यू में उन कहानियों पर खुलकर अपनी बात रखी है।
पहली शादी और बेटों की कहानी क्या थी?
विनोद खन्ना ने 1971 में Geetanjali Khanna से शादी की थी। इस शादी से उनके दो बेटे हुए—Rahul Khanna और Akshaye Khanna। दोनों ही आगे चलकर फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा बने। लेकिन 1980 के दशक में विनोद खन्ना का झुकाव आध्यात्म की ओर हुआ और वे Osho के साथ जुड़ गए, जिसके बाद 1985 में उनका तलाक हो गया। 1990 में विनोद खन्ना ने Kavita Khanna से शादी की। इस शादी से उनके दो बच्चे हुए—साक्षी और श्रद्धा खन्ना। हालिया बातचीत में कविता ने साफ किया कि उन्होंने कभी विनोद की पहली शादी से हुए बेटों की मां बनने की कोशिश नहीं की।
कविता ने सौतेले बेटों को लेकर क्या कहा?
लवीना टंडन के साथ बातचीत में कविता खन्ना ने कहा, “वे मेरे थे क्योंकि वे विनोद के बच्चे थे। उन्हें मेरा होना ही था, लेकिन वे मेरे नहीं थे। मैंने उनके लिए मां बनने की कोशिश नहीं की, क्योंकि उन्हें पहले से ही एक बहुत अच्छी मां मिली थी।” इस बयान ने उस सोच को चुनौती दी जिसमें सौतेले रिश्तों को हमेशा टकराव से जोड़ा जाता है।
पहली पत्नी गीतांजलि से रिश्ते पर क्या बोलीं कविता?
खन्ना ने विनोद खन्ना की पहली पत्नी गीतांजलि खन्ना के साथ अपने रिश्ते को लेकर कहा कि उनके बीच हमेशा सम्मान और स्पष्ट सीमाएं रहीं। उन्होंने कहा, “हमें उन काल्पनिक कहानियों से प्रभावित नहीं होना चाहिए जिनमें एक पत्नी पीड़ित और दूसरी क्रूर होती है। असल ज़िंदगी इतनी आसान या फिल्मी नहीं होती। जब लोग समझदार होते हैं, तो वे समझदारी से फैसले लेते हैं और उन पर टिके रहते हैं।”
अक्षय खन्ना ने पिता के फैसले पर क्या कहा था?
एक पुराने इंटरव्यू में Akshaye Khanna ने अपने पिता के संन्यास लेने के फैसले पर बात की थी। उन्होंने कहा था कि संन्यास का मतलब सिर्फ परिवार छोड़ना नहीं, बल्कि पूरी ज़िंदगी को त्याग देना होता है। अक्षय के मुताबिक, “पांच साल के बच्चे के रूप में उस फैसले को समझ पाना नामुमकिन था, लेकिन ऐसा निर्णय तभी लिया जाता है जब अंदर कुछ बहुत गहरा चल रहा हो।”
विनोद खन्ना के भीतर क्या चल रहा था?
अक्षय खन्ना ने यह भी कहा कि जब किसी के पास जीवन में सब कुछ हो—नाम, शोहरत, पैसा—तो उस सबको छोड़ने के लिए भीतर एक बड़ा बदलाव जरूरी होता है। विनोद खन्ना के फैसले को उन्होंने जीवन बदल देने वाला और बेहद गहरा बताया। कविता खन्ना का बयान यह दिखाता है कि रिश्ते हमेशा टकराव या ड्रामे से तय नहीं होते। सम्मान, समझ और सीमाएं हों, तो टूटे परिवार भी गरिमा के साथ आगे बढ़ सकते हैं। विनोद खन्ना की ज़िंदगी का यह पहलू अब भावनात्मक आरोपों से हटकर संतुलित नजरिए से सामने आया है।

























