साल 2026 की शुरुआत महाराष्ट्र से हो रही है और यहीं से माहौल का अंदाजा भी लगाया जा रहा है। यहां भाजपा के नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन मैदान में है। सामने महाविकास अघाड़ी है जिसमें कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना शामिल हैं। लेकिन गठबंधन के भीतर खींचतान साफ दिखती है। पारिवारिक राजनीति ने समीकरण उलझा दिए हैं। मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की नजदीकी चर्चा में है। इन सबके बीच भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
क्या बंगाल में ममता परीक्षा?
पश्चिम बंगाल में यह चुनाव ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। भाजपा पूरी ताकत के साथ उन्हें घेरने की कोशिश में है। ममता खुद को केंद्र के मुकाबले राज्य की आवाज बताकर मैदान में हैं। वोटर लिस्ट और कानूनी मुद्दों पर वह आक्रामक हैं। भाजपा भ्रष्टाचार और सुरक्षा को मुद्दा बना रही है। बंगाल की यह लड़ाई अब सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रही। यहां का नतीजा राष्ट्रीय राजनीति को दिशा देगा। 2029 में ममता की भूमिका भी यहीं से तय होगी।
क्या असम में हिम्मत दांव?
असम भी 2026 की राजनीति में अहम मोर्चा बन चुका है। यहां मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की साख दांव पर है। घुसपैठ और नागरिकता जैसे मुद्दे चुनाव का केंद्र बने हुए हैं। जातीय और जनजातीय गणित मुकाबले को कठिन बना रहा है। भाजपा का संगठन मजबूत नजर आता है। लेकिन विपक्ष भी मौके की तलाश में है। असम का फैसला पूर्वोत्तर की राजनीति का मिजाज बताएगा। यहां की हवा दूर तक असर डालेगी।
क्या तमिलनाडु में गेम बदलेगा?
तमिलनाडु में भाजपा के लिए राह हमेशा कठिन रही है। यहां डीएमके और एआईएडीएमके का दबदबा रहा है। लेकिन अब राजनीति फिल्मी मोड़ पर है। अभिनेता विजय अपनी पार्टी के साथ मैदान में उतर चुके हैं। उन्होंने डीएमके को मुख्य विरोधी बताया है। भाजपा को वैचारिक प्रतिद्वंद्वी कहा है। यह एंट्री वोटों के बंटवारे का कारण बन सकती है। इससे किसे फायदा होगा यह साफ नहीं है। तमिलनाडु का नतीजा चौंकाने वाला हो सकता है।
क्या केरल में इतिहास टूटेगा?
केरल में वाम मोर्चा तीसरी बार सत्ता में लौटने की कोशिश कर रहा है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के सामने चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोप माहौल गर्म कर रहे हैं। यूडीएफ को सत्ता में वापसी का मौका दिख रहा है। प्रियंका गांधी वाड्रा की सक्रियता ने कांग्रेस में जान डाली है। भाजपा भी धीरे धीरे जमीन बना रही है। केरल का फैसला दक्षिण की राजनीति को नया मोड़ देगा।
क्या ये राह 2029 तक?
2026 की ये सारी चुनावी लड़ाइयां अलग नहीं हैं। हर राज्य का नतीजा 2029 से जुड़ा है। भाजपा अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है। विपक्ष एकजुट होने के लिए संघर्ष कर रहा है। वोटर स्थानीय मुद्दों पर फैसला करेंगे। लेकिन संदेश राष्ट्रीय स्तर पर जाएगा। 2026 बताएगा देश किस दिशा में बढ़ रहा है। सत्ता की बाजी अब निर्णायक दौर में है। यह सेमीफाइनल ही फाइनल की पटकथा लिखेगा।

























