पंजाब में नशों के खिलाफ चल रही जंग अब स्कूलों तक पहुंच चुकी है। सरकार ने स्कूल आधारित एक्शन प्रोग्राम लागू किया है। मकसद बच्चों को शुरुआत से ही सुरक्षित रखना है। शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने कहा कि शिक्षक अब पहली सुरक्षा लाइन बनेंगे। स्कूल केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं रहेंगे। वे बच्चों की रक्षा का किला भी होंगे। यह लड़ाई सिर्फ पुलिस की नहीं है। परिवार और समाज भी इसमें शामिल होंगे। सरकार चाहती है कि बच्चे गलत रास्ते पर न जाएं। इसी सोच के साथ यह योजना लाई गई है। यह बदलाव बहुत बड़ा माना जा रहा है।
नया नशा विरोधी पाठ्यक्रम कब से लागू होगा?
शिक्षा मंत्री ने बताया कि अगले अकादमिक सत्र से नया पाठ्यक्रम शुरू होगा। यह ग्यारहवीं और बारहवीं के छात्रों के लिए होगा। इसमें नशों के नुकसान आसान भाषा में बताए जाएंगे। बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से जानकारी दी जाएगी। किसी को डराया नहीं जाएगा। उन्हें समझाया जाएगा। ताकि वे सही और गलत में फर्क समझ सकें। दबाव या लालच में न आएं। खुद से फैसला लेना सीखें। यह पढ़ाई उनकी सोच बदलने के लिए होगी। सरकार मानती है कि जानकारी सबसे बड़ी ताकत है।
ध्यान सत्र बच्चों को कैसे मजबूत बनाएगा?
सरकार मोहाली के स्कूलों में ध्यान सत्र शुरू कर रही है। हर सुबह करीब तीस मिनट का सत्र होगा। इसका मकसद मन को शांत करना है। इससे बच्चों का आत्म नियंत्रण बढ़ेगा। भावनाएं संतुलित रहेंगी। बच्चे खुद को बेहतर समझ पाएंगे। सरकार मानती है कि मजबूत मन ही नशे को मना कर सकता है। यह अभ्यास बच्चों को भीतर से ताकत देगा। वे गलत चीजों से दूर रहेंगे। यह तरीका नशे से बचाने में कारगर माना जा रहा है। इसलिए इसे स्कूलों में लाया जा रहा है।
शिक्षकों को किस तरह की ट्रेनिंग दी जाएगी?
मोहाली के स्कूल ऑफ एमिनेंस में शिक्षकों से बातचीत हुई। इसमें कई प्रिंसिपल और शिक्षक शामिल हुए। दिल्ली के नेता मनीष सिसोदिया भी वहां मौजूद थे। शिक्षकों को सिखाया गया कि खतरे के शुरुआती संकेत कैसे पहचानें। बच्चे से बात कैसे करें। कब दखल देना है। यह ट्रेनिंग पूरे राज्य में दी जाएगी। इसका मकसद है कि कोई बच्चा नशे की ओर न जाए। शिक्षक समय रहते उसकी मदद कर सकें। यह एक नई जिम्मेदारी होगी। सरकार इसे गंभीरता से ले रही है।
शिकायत बॉक्स से नशे की खबर कैसे मिलेगी?
हर स्कूल में शिकायत और सुझाव बॉक्स लगाया गया है। बच्चे बिना नाम बताए जानकारी दे सकते हैं। अगर कहीं नशा बिक रहा हो तो वह लिख सकते हैं। अगर किसी दोस्त को खतरा हो तो भी बता सकते हैं। यह जानकारी राज्य स्तर पर जांची जाएगी। फिर उस पर कार्रवाई होगी। सरकार कहती है कि बच्चों को डरना नहीं चाहिए। उन्हें जिम्मेदार बनाना है। इस सिस्टम से नशे की सप्लाई पर नजर रखी जाएगी। इससे स्कूल के आसपास का माहौल सुरक्षित बनेगा। यह योजना काफी अहम मानी जा रही है।
मनीष सिसोदिया ने इसे दिमाग का पहरेदार क्यों कहा?
मनीष सिसोदिया ने इस मुहिम को खास बताया। उन्होंने कहा कि सरकार केवल सड़क के पहरेदार नहीं बना रही। वह दिमाग के पहरेदार भी बना रही है। मतलब बच्चों की सोच को सुरक्षित किया जा रहा है। ताकि वे किसी दबाव में न आएं। उनका चरित्र मजबूत हो। वे हर गलत चीज को ना कह सकें। यह अभियान उनके भविष्य को सुरक्षित करेगा। सरकार चाहती है कि नशा जड़ से खत्म हो। इसके लिए बच्चों की सोच बदलना जरूरी है। यही इस योजना की आत्मा है।
स्कूलों में इस कार्यक्रम का माहौल कैसा रहा?
इस बैठक में शिक्षकों ने कई सुझाव दिए। नेताओं ने उनकी बातों को सराहा। शिक्षकों को अपने स्कूल में मुहिम की अगुवाई करने को कहा गया। कार्यक्रम में पंजाब बोर्ड के अध्यक्ष भी मौजूद थे। छात्राओं ने गिद्धा भी पेश किया। गीतों में नशा मुक्त पंजाब का संदेश था। पूरा माहौल सकारात्मक था। सभी ने मिलकर इस लड़ाई को मजबूत बनाने की बात कही। स्कूलों में अब एक नई उम्मीद दिख रही है। यह अभियान आने वाले समय में बड़ा असर डाल सकता है।

























