ईरान की कई सड़कों पर भारी भीड़ देखी जा रही है। लोग आज़ादी के नारे लगा रहे हैं। हर तरफ गुस्सा है। पुलिस और सुरक्षाबल तैनात हैं। कई जगह गोलियां चली हैं। लोग डर के बावजूद पीछे नहीं हट रहे हैं। घरों से युवा बाहर निकल रहे हैं। महिलाएं भी सड़कों पर हैं। सरकार पर नाराज़गी खुलकर दिख रही है। हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। हर शहर से विरोध की खबर आ रही है। माहौल पूरी तरह तनाव भरा है।
इंटरनेट और फोन क्यों बंद कर दिए गए?
ईरान में इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दी गई हैं। लोग अपने परिवार से बात नहीं कर पा रहे हैं। सोशल मीडिया पूरी तरह ठप है। रज़ा पहलवी का कहना है कि यह सच्चाई छुपाने की कोशिश है। सरकार चाहती है कि दुनिया कुछ न देख सके। प्रदर्शनकारियों के वीडियो बाहर नहीं जा रहे हैं। कई लोग घरों में कैद जैसे हो गए हैं। बाहर निकलने वाले सबसे ज्यादा खतरे में हैं। ब्लैकआउट से अफरा तफरी बढ़ रही है। अस्पतालों तक सूचना नहीं पहुंच रही। हालात और डरावने हो गए हैं।
रज़ा पहलवी ने ट्रंप से क्या मांगा?
रज़ा पहलवी ने ट्रंप से खुली अपील की है। उन्होंने कहा कि अब समय बहुत कम है। लाखों ईरानी सड़कों पर हैं। वे अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। पहलवी ने कहा कि अमेरिका की आवाज असर डाल सकती है। पहले भी दबाव से सुरक्षाबल पीछे हटे थे। अब फिर वही जरूरत है। ट्रंप का साफ समर्थन लोगों को ताकत देगा। ईरानी जनता उम्मीद लगाए बैठी है। यह मानवता का सवाल बन चुका है। दुनिया को चुप नहीं रहना चाहिए।
खामनेई ने अमेरिका पर क्या कहा?
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामनेई ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप ईरानी खून के जिम्मेदार हैं। सरकार का दावा है कि प्रदर्शन विदेशी साजिश हैं। खामनेई ने अमेरिका को भड़काने वाला बताया। उन्होंने कहा कि ईरान अपने फैसले खुद करेगा। सरकारी बयान लगातार सख्त हो रहे हैं। किसी भी बाहरी दखल को गलत कहा जा रहा है। सरकार विरोध को दबाने में जुटी है। बयानबाजी और तेज हो गई है। हालात और टकराव की ओर बढ़ रहे हैं।
सरकारी मीडिया क्या दिखा रहा है?
ईरान के सरकारी चैनल एक अलग तस्वीर दिखा रहे हैं। टीवी पर प्रदर्शनकारियों को गलत बताया जा रहा है। अमेरिका विरोधी नारे दिखाए जा रहे हैं। सरकार कह रही है कि यह सब विदेशी साजिश है। आम लोगों की परेशानी नहीं दिखाई जा रही। हिंसा की खबरें गायब हैं। डर फैलाने वाले प्रोग्राम चल रहे हैं। लोगों को घर में रहने को कहा जा रहा है। हर चैनल पर सरकारी लाइन है। सच सामने नहीं आ रहा है। मीडिया सरकार के साथ खड़ा है।
अगले घंटों में क्या हो सकता है?
रज़ा पहलवी ने कहा है कि आगे बड़े प्रदर्शन हो सकते हैं। लोगों से फिर सड़कों पर आने की अपील की गई है। हालात तेजी से बदल रहे हैं। सरकार और सख्ती कर सकती है। टकराव का खतरा बढ़ गया है। दुनिया की नजर ईरान पर है। अगर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा तो बदलाव आ सकता है। नहीं तो हिंसा और बढ़ेगी। आम लोग सबसे ज्यादा खतरे में हैं। हर घंटे स्थिति बदल रही है। डर और उम्मीद साथ चल रहे हैं।
क्या दुनिया ईरान के लिए आगे आएगी?
अब सवाल यह है कि दुनिया क्या करेगी। क्या अमेरिका खुलकर बोलेगा। क्या ट्रंप कोई कदम उठाएंगे। ईरानी जनता इसी ओर देख रही है। रज़ा पहलवी को यही उम्मीद है। अगर समर्थन मिला तो हालात बदल सकते हैं। अगर चुप्पी रही तो खून और बह सकता है। यह सिर्फ ईरान का मुद्दा नहीं है। यह मानव अधिकारों का सवाल है। हर देश की जिम्मेदारी बनती है। वक्त तेजी से निकल रहा है। फैसला इतिहास लिखेगा।
























