अमेरिका में भीषण ठंड, आइसक्वेक और बर्फीले तूफानों ने भारी तबाही मचाई है। अब तक 30 मौतें हो चुकी हैं और लाखों घरों में बिजली नहीं है।
कुदरत ने अमेरिका को कैसे हिला दिया?
अमेरिका इस समय कड़ाके की ठंड और अचानक आए आइसक्वेक से जूझ रहा है। उत्तर और पूर्वी राज्यों में बर्फीले तूफान चले। जमीन कांपी। लोग डर गए। रोजमर्रा की जिंदगी थम गई। सड़कें सुनसान हो गईं। घरों में कैद जैसा माहौल बन गया।
2100 किलोमीटर तक बर्फ कैसे छा गई?
आर्कनसास से न्यू इंग्लैंड तक करीब 2100 किलोमीटर इलाका बर्फ की चादर में ढक गया। कई जगह एक फुट से ज्यादा बर्फ जमी। हाईवे बंद हो गए। हजारों वाहन रास्ते में फंस गए। स्कूल बंद करने पड़े। आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई।
कड़ाके की ठंड ने जानें कैसे लीं?
राष्ट्रीय मौसम सेवा के अनुसार कई इलाकों में तापमान शून्य से 31 डिग्री सेल्सियस नीचे चला गया। पिट्सबर्ग के आसपास 20 इंच तक बर्फ गिरी। फिसलन से हादसे बढ़े। बर्फीली बारिश ने हालात और खराब कर दिए। अब तक 30 लोगों की मौत हो चुकी है। कई लोग घायल हैं।
बिजली गुल होने से परेशानी कितनी बढ़ी?
तूफान का सबसे बड़ा असर बिजली सप्लाई पर पड़ा। PowerOutage.com के अनुसार 7.5 लाख से ज्यादा घरों में बिजली गुल रही। हीटर बंद हो गए। गर्म पानी नहीं मिला। लोग अंधेरे में रहे। बुजुर्ग और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। कई परिवारों ने रातें ठिठुरते हुए बिताईं।
मिसिसिपी में हालात सबसे खराब क्यों रहे?
मिसिसिपी के कई हिस्सों ने 1994 के बाद सबसे भयानक बर्फीला तूफान देखा। यूनिवर्सिटियों ने पूरे हफ्ते की क्लासें रद्द कर दीं। ऑक्सफोर्ड कैंपस बर्फ से ढक गया। सामान्य गतिविधियां रुक गईं। बाजार बंद रहे। लोग घरों में कैद हो गए।
उड़ानें रुकने से देश कैसे थम गया?
खराब मौसम ने हवाई सेवाओं को भी बुरी तरह प्रभावित किया। FlightAware के मुताबिक एक दिन में 8,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द या लेट हुईं। रविवार को करीब 45 फीसदी उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। एयरपोर्ट भरे रहे। यात्री फंसे रहे। योजनाएं रद्द हो गईं।
हालात कब सुधरेंगे, यही बड़ा सवाल
अधिकारियों के अनुसार मौसम धीरे-धीरे सुधर सकता है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। बर्फ हटाने में दिन लगेंगे। लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई है। आपात सेवाएं लगातार काम कर रही हैं। इस वक्त अमेरिका में इंसान कुदरत के आगे बेबस नजर आ रहा है।

























