अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।अमेरिकी सेना की मौजूदगी मिडिल ईस्ट में तेज हुई है।ऐसे में सऊदी अरब पर भी दबाव महसूस किया गया।लेकिन सऊदी नेतृत्व ने साफ इनकार कर दिया।उसने हवाई क्षेत्र देने से मना कर दिया।यह फैसला रणनीतिक माना जा रहा है।इससे क्षेत्रीय संतुलन बदल सकता है।
ट्रंप की रणनीति को झटका कैसे लगा?
राष्ट्रपति ट्रंप ईरान पर दबाव की नीति अपना रहे हैं।अमेरिका सैन्य विकल्प खुले रखना चाहता है।सऊदी का सहयोग इसमें अहम माना जाता था।लेकिन इनकार से रास्ता मुश्किल हुआ है।हवाई मार्ग सीमित हो सकते हैं।लॉजिस्टिक प्लान पर असर पड़ेगा।यह वॉशिंगटन के लिए बड़ा संकेत है।
सऊदी नेतृत्व ने क्या संदेश दिया?
सऊदी अरब ने क्षेत्रीय शांति को प्राथमिकता बताई है।उसका कहना है कि जंग से अस्थिरता बढ़ेगी।तेल बाजार पर भी असर पड़ेगा।वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।इसलिए सऊदी जोखिम नहीं लेना चाहता।वह तटस्थ रुख दिखा रहा है।यह संदेश साफ और सख्त है।
यूएई जैसे देशों की भूमिका क्या रही?
सऊदी से पहले यूएई भी ऐसा संकेत दे चुका है।यूएई ने भी अपने क्षेत्र के इस्तेमाल से इनकार किया।दोनों देशों का रुख मिलताजुलता है।यह मिडिल ईस्ट की सोच दिखाता है।क्षेत्रीय देश युद्ध से बचना चाहते हैं।वे अपने हित पहले रख रहे हैं।अमेरिका के लिए यह नई चुनौती है।
अमेरिकी सैन्य हलचल क्यों बढ़ी?
अमेरिका ने युद्धपोत और जहाज तैनात किए हैं।कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी क्षेत्र में पहुंचा है।इससे हमले की आशंका बढ़ी।ईरान पर दबाव की कोशिश दिखी।लेकिन सहयोग के बिना ऑपरेशन कठिन है।हवाई और जमीनी रास्ते जरूरी होते हैं।यहीं पर सऊदी का फैसला अहम बनता है।
मिडिल ईस्ट की राजनीति में क्या बदला?
अब क्षेत्रीय देश ज्यादा स्वतंत्र फैसले ले रहे हैं।वे हर कदम पर अमेरिका का साथ नहीं दे रहे।अपने आर्थिक और सुरक्षा हित देख रहे हैं।तेल और व्यापार उनके लिए अहम हैं।इसलिए युद्ध से दूरी रखी जा रही है।यह बदलाव साफ नजर आ रहा है।मिडिल ईस्ट की राजनीति नई दिशा में है।
आगे अमेरिका के पास क्या विकल्प हैं?
अब अमेरिका को कूटनीति पर जोर देना पड़ सकता है।प्रतिबंधों का रास्ता भी खुला है।सीधी सैन्य कार्रवाई मुश्किल दिखती है।सहयोगी देशों को मनाने की कोशिश होगी।लेकिन भरोसा पहले जैसा नहीं रहा।सऊदी का फैसला मिसाल बन सकता है।आने वाले दिन निर्णायक होंगे।
























