इस्लामाबाद में अचानक सुरक्षा बढ़ा दी गई। कई मुख्य सड़कें बंद कर दी गईं। शहर के अंदर आवाजाही मुश्किल हो गई। हर तरफ जाम का माहौल दिखा। लोग घंटों फंसे रहे। रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर पड़ा। दफ्तर जाना भी चुनौती बन गया। शहर जैसे थम सा गया।
क्या कारोबार पर पड़ा सीधा असर?
सुरक्षा बंदिशों का सबसे बड़ा असर कारोबार पर पड़ा। बाजारों में सन्नाटा दिखने लगा। दुकानों पर ग्राहक नहीं पहुंचे। छोटे व्यापारियों की कमाई गिर गई। कई दुकानदारों ने कहा कि आमदनी आधी रह गई। रोज कमाने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। हालात तेजी से बिगड़ते नजर आए।
क्या दिहाड़ी मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित?
दिहाड़ी मजदूरों की हालत सबसे खराब हो गई। काम बंद होने से कमाई रुक गई। पहले ही महंगाई से लोग परेशान थे। अब आय का रास्ता भी बंद हो गया। घर चलाना मुश्किल हो गया। कई परिवारों के सामने संकट खड़ा हो गया। लोगों की चिंता साफ दिखने लगी।
क्या प्रशासन ने साफ जानकारी दी?
लोगों का कहना है कि प्रशासन ने साफ जानकारी नहीं दी। किसी को नहीं पता कि पाबंदियां कब तक रहेंगी। अफवाहों का बाजार गर्म हो गया। विदेशी दौरों की चर्चा ने भ्रम बढ़ाया। लोग असमंजस में जी रहे हैं। हर दिन नई खबर सामने आ रही है। भरोसा कमजोर होता दिख रहा है।
क्या जनता में गुस्सा बढ़ रहा?
शहर में लोगों का गुस्सा साफ नजर आया। कई लोगों ने खुलकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि यह लड़ाई दूसरे देशों की है। लेकिन असर आम नागरिक झेल रहे हैं। एक स्थानीय निवासी ने कहा कि हालात बेहद खराब हैं। रोजगार खत्म हो रहा है। महंगाई बढ़ती जा रही है। जनता खुद को असहाय महसूस कर रही है।
क्या अनिश्चितता ने हालात बिगाड़े?
लंबे समय तक चल रही अनिश्चितता ने हालात और खराब किए। लोगों को नहीं पता कि आगे क्या होगा। काम बंद है, आमदनी रुकी है। बाजार ठप हैं। हर तरफ बेचैनी का माहौल है। लोग जल्दी समाधान चाहते हैं। जिंदगी पटरी पर लौटे, यही मांग है।
क्या हालात लॉकडाउन जैसे बने?
पूरे शहर में लॉकडाउन जैसे हालात बन गए। आवाजाही पर सख्त नजर रखी जा रही है। हर मोड़ पर जांच बढ़ी है। लोग घरों में रहने को मजबूर हैं। रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ा है। यह स्थिति लंबे समय तक चली तो मुश्किल और बढ़ेगी। सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है

























