अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump की पत्नी Melania Trump पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘मेलानिया’ से काफी उम्मीदें थीं।लेकिन ब्रिटेन में शुरुआती टिकट बिक्री ने तस्वीर साफ कर दी।रिपोर्ट्स के मुताबिक दर्शकों की रुचि बेहद कम है।लंदन जैसे बड़े शहरों में भी सिनेमाघर खाली नजर आए।फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर भी खास चर्चा नहीं दिखी।इसी वजह से इसे रिलीज से पहले ही फ्लॉप बताया जा रहा है।
लंदन के सिनेमाघरों में हालात कितने खराब रहे?
ब्रिटिश अखबार The Guardian की रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे।लंदन के इस्लिंगटन इलाके में एक बड़े सिनेमाघर में दोपहर के शो के लिए सिर्फ एक टिकट बिका।शाम के शो में भी केवल दो दर्शक पहुंचे।कई अन्य सिनेमाघरों में तो एक भी टिकट पहले से नहीं बिका।सीटें खाली पड़ी रहीं।उम्मीद के उलट हालात बेहद कमजोर रहे।
सिनेमा चेन ने टिकट बिक्री पर क्या कहा?
ब्रिटेन की बड़ी सिनेमा चेन व्यू के सीईओ टिम रिचर्ड्स ने माना कि फिल्म की बिक्री कमजोर रही।उन्होंने कहा कि उन्हें कई ईमेल मिले।कुछ लोगों ने फिल्म दिखाने पर आपत्ति जताई।लेकिन उन्होंने साफ किया कि सेंसर बोर्ड की मंजूरी के बाद फिल्म दिखाना उनकी जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा कि वे राजनीतिक या सार्वजनिक राय के आधार पर फिल्मों को नहीं रोकते।इस बयान से भी साफ हुआ कि दर्शकों की कमी बड़ी समस्या है।
डॉक्यूमेंट्री में दिखाया क्या गया है?
यह फिल्म ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के शपथ ग्रहण से पहले के 20 दिनों पर आधारित है।इसमें मेलानिया ट्रंप के निजी और पेशेवर जीवन को दिखाया गया है।फैशन से लेकर सार्वजनिक कार्यक्रमों तक की झलक है।राजनयिक बैठकों और सीक्रेट सर्विस की भूमिका भी दिखाई गई है।परिवार की निजी बातचीत को भी जगह मिली है।कुछ दृश्यों में राष्ट्रपति का हल्का अंदाज भी नजर आता है।फिल्म को गंभीर और व्यक्तिगत बनाने की कोशिश की गई है।
इतना बड़ा बजट होने के बावजूद असर क्यों नहीं पड़ा?
इस डॉक्यूमेंट्री को Amazon MGM Studios ने तैयार किया है।रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके अधिकारों के लिए 40 मिलियन डॉलर का सौदा हुआ।मार्केटिंग पर भी करीब 35 मिलियन डॉलर खर्च किए गए।इसके बावजूद दर्शकों में उत्साह नहीं दिखा।विशेषज्ञ मानते हैं कि ब्रिटेन में ट्रंप परिवार को लेकर रुचि सीमित है।राजनीतिक पृष्ठभूमि भी दर्शकों को दूर कर सकती है।
व्हाइट हाउस स्क्रीनिंग के बाद भी माहौल क्यों नहीं बना?
फिल्म की निजी स्क्रीनिंग व्हाइट हाउस में भी की जा चुकी है।इसके बाद उम्मीद थी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बढ़ेगी।लेकिन ऐसा नहीं हुआ।ब्रिटेन में न तो मीडिया हाइप बना।न ही दर्शकों में जिज्ञासा दिखी।फिल्म का विषय सीमित दर्शक वर्ग तक ही सिमटता नजर आया।यही वजह है कि बड़े प्रचार का असर जमीन पर नहीं दिखा।
क्या यह डॉक्यूमेंट्री भविष्य में चल पाएगी?
फिल्म 30 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है।अब इसकी किस्मत आने वाले दिनों में तय होगी।अगर दर्शकों की प्रतिक्रिया नहीं बदली तो नुकसान बढ़ सकता है।विश्लेषकों का मानना है कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर इसे बेहतर दर्शक मिल सकते हैं।लेकिन थिएटर बिजनेस के लिहाज से स्थिति फिलहाल कमजोर है।भारी निवेश के बाद यह प्रदर्शन निर्माताओं के लिए चिंता का कारण बन गया है।

























